
ध्रुव चरित्र की कहानी सुनकर श्रोता भावविभोर हुए
जयपुर। आमेर के शिव पार्क धानका की तलाई पीली में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में महाराज श्री मोहन शर्मा ने कथा वाचन कर अवतार वर्णन, परीक्षित श्राप व ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। मंगलवार को उन्होंने भक्तराज ध्रुव की कथा के माध्यम से श्रोताओं को भक्ति और दृढ़ संकल्प को विस्तार से समझाया। ध्रुव चरित्र की कहानी सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए और संकल्प और विश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने की सीख ली।
सिंहासन प्राप्त करना है तो भगवान नारायण का भजन कर
कथावाचक ने कहा कि राजा उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो भार्याएं थीं। राजा उत्तानपाद के सुनीति से ध्रुव तथा सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र हुए। सुनीति बड़ी रानी थी, पर राजा उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। एक बार राजा उत्तानपाद ध्रुव को गोद में लिए बैठे थे, तभी छोटी रानी सुरुचि वहां आई। अपने सौत के पुत्र ध्रुव को राजा की गोद में बैठे देख कर वह ईर्ष्या से जल उठी। झपटकर उसने ध्रुव को राजा की गोद से खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उनकी गोद में बिठाते हुए कहा, रे मूर्ख! राजा की गोद में वही बालक बैठ सकता है, जो मेरी कोख से उत्पन्न हुआ है। तू मेरी कोख से उत्पन्न नहीं हुआ है। तुझे इनकी गोद में तथा राजसिंहासन पर बैठने का अधिकार नहीं है। यदि तेरी इच्छा राज सिंहासन प्राप्त करने की है तो भगवान नारायण का भजन कर। उनकी कृपा से जब तू मेरे गर्भ से उत्पन्न होगा तभी राजपद को प्राप्त कर सकेगा। बालक ध्रुव अल्पकाल में ही उसकी तपस्या से भगवान नारायण उनसे प्रसन्न होकर उसे दर्शन देकर कहा, हे राजकुमार! मैं तेरे अन्तःकरण की बात को जानता हूं। तेरी सभी इच्छाएं पूर्ण होंगी। समस्त प्रकार के सर्वोत्तम ऐश्वर्य भोग कर अंत समय में तू मेरे लोक को प्राप्त करेगा, इसलिए हमें समझना चाहिए नाम जप व दृढ संकल्प से ईश्वर शीघ्र प्रसन्न होकर हमारा कल्याण करते हैं।
Published on:
12 Apr 2023 01:20 pm
