जयपुर। सीकर रोड पर प्रस्तावित न्यू ट्रांसपोर्ट नगर योजना में सरकार की ढिलाई ने मामला गरमा दिया है। इस मामले को लेकर ट्रांसपोर्टर आक्रोशित है। साथ ही जल्द ही योजना को अमली जामा नहीं पहनाने पर जेडीए का घेराव और बड़ा आंदोलनात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। आंदोलन को लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने संघर्ष समिति का गठन कर लिया है। साथ ही अपना छह सूत्रीय मांग पत्र नगरीय विकास मंत्री को सौंप दिया है।
जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एसोसिएशन के प्रवक्ता राजीव त्रेहान ने बताया कि बैठक में ट्रांसपोर्ट से जुड़ी 13 संस्थाओं के अध्यक्षों ने भाग लिया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2004 में सीकर रोड ट्रांसपोर्ट योजना बनाई थी। वर्ष 2007 में सरकार ने 1111 रुपए वर्ग मीटर के हिसाब से कुछ प्लाट आवंटित भी किए थे, लेकिन वर्ष 2018 में लॉटरी में निकले प्लाटों के 13 हजार 500 रुपए की मांग की गई, जो अनुचित है। बैठक में जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर सतीश जैन, वीकेआई अध्यक्ष जगदीश चौधरी, परचून यूनियन अध्यक्ष रामअवतार मोर, राजन सिंह, महामंत्री चानन मल राडा, अध्यक्ष ओल्ड टायर यूनियन, न्यू टायर यूनियन, मिनी बस ऑपरेटर यूनियन, बैटरी यूनियन आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह है ट्रांसपोर्ट आॅपरेटर्स की प्रमुख मांगें
— सीकर रोड ट्रांसपोर्ट नगर स्कीम में 1111 रुपए वर्ग मीटर के भाव से ही अब जमीन का आवंटन किया जाए। अजमेर रोड और आगरा रोड पर योजना के चलते जो लोग सीकर रोड की योजना में आवेदन नहीं कर पाए। ऐसे लोगों को सीकर रोड की योजना में आवेदन करने का मौका दिया जाए। इन लोगों का प्रमाणिकरण ट्रांसपोर्ट यूनियन की ओर से किया जाएगा कि यह 2004 से पहले के यूनियन के मेंबर है। 30 से 40 ट्रांसपोटर्स ऐसे हैं जो 35 से 40 वर्ष से ट्रांसपोर्ट का कारोबार कर रहे हैं। साथ ही यूनियन के सदस्य भी है, लेकिन जेडीए की गलती के चलते इनके फार्म रिजेक्ट कर दिए गए, जबकि इन लोगों के फार्म आवंटन शुल्क की राशि 31 हजार रुपए भी जमा है। इन्हें जमीन का आवंटन किया जाए।
इसके अलावा जिन ट्रांसपोर्टरों के बड़े प्लाटों को जेडीए की गलती से काटकर छोटा किया गया है। उन्हें उतनी ही जमीन दी जाए जितनी उन्होंने आवेदन में भरी है।इसके अलावा पेनल्टी व ब्याज माफ किया जाए। यह भी सरकार की ओर से तय किया जाए कि ट्रांसपोर्टरों की जमीन ट्रांसपोर्ट ही ही खरीदें सके। ऑटो पार्ट की जगह ऑटो पार्ट, टायर डीलर की जगह टायर डीलर को ही जमीन का बेचान किया जाए। सरकार यह तय करें कि जिस कारोबार के लिए जमीन आवंटित की गई है। उस पर वहीं कारोबार किया जाए।