आमेर महल में अयोध्या की तर्ज पर बनी सीता रसोई में रामायण कथा पर आधारित बेहतरीन चित्र बने हैं। रियासत के सरकारी परवानों पर श्री सीतारामो जयति लिखा जाता रहा। भगवान श्रीराम की तरह सवाई जयसिंह ने भी राजसूर्य, वाजपेय और अश्वमेध जैसे महान यज्ञ करवाए। अयोध्या की सरयू की तरह जयपुर में नदी नहीं होने से प्रतीक के रुप में द्रव्यवती का पानी लाकर चांदपोल में चौपड़ों के बीच होते हुए एक नहर निकाली गई, जिसके अवशेष मेट्रो की खुदाई के समय निकले हैं। नवगृह के आधार पर बसे जयपुर के एक भाग का नाम चौकड़ी रामचन्द्रजी रखा गया। छोटी चौपड़, चंादपोल के अलावा रास्तों में राम के मंदिर हैं। रावण वध करने वाले विजय राघव का मंदिर बालानंदजी के मठ में है।