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उपनेता राजेंद्र राठौड़ कोर्ट में बोले, ‘विधायकों ने खुद दिए हैं इस्तीफे, स्पीकर क्यों कर रहे हैं देरी’

राजस्थान में कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे से जुड़े मामले को लेकर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश पंकज मिथल और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

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उपनेता राजेंद्र राठौड़ कोर्ट में बोले, 'विधायकों ने खुद दिए हैं इस्तीफे, स्पीकर क्यों कर रहे हैं देरी'

उपनेता राजेंद्र राठौड़ कोर्ट में बोले, 'विधायकों ने खुद दिए हैं इस्तीफे, स्पीकर क्यों कर रहे हैं देरी'

जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे से जुड़े मामले को लेकर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश पंकज मिथल और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ में सुनवाई हुई। याचिका पर पैरवी खुद उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी के प्रार्थना पत्र पर भी कोर्ट में सुनवाई करते हुए कहा कि जरूरत होने पर उनको भी सुना जाएगा। वहीं, विधानसभा की ओर से महाधिवक्ता महेंद्र सिंह सिंघवी ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप स्पीकर से पूछ कर बताएं कि अगले सत्र से पहले इस्तीफों पर निर्णय कर लेंगे या नहीं? अब मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

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उपनेता राजेंद्र राठौड़ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि राजस्थान में सियासी उठापट के दौरान बीती 25 सितंबर में कांग्रेस के कई विधायकों ने इस्तीफा दिया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इन इस्तीफों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि विधायकों ने खुद ही इस्तीफा दिया है तो विधानसभा अध्यक्ष इस पर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों कर रहे हैं? साथ ही कहा गया है कि विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने के अलावा अध्यक्ष के पास कोई विकल्प नहीं है। विधायकों का यह इस्तीफा स्वैच्छिक है या नहीं, इसको लेकर जांच की जाए। उन्होंने कहा कि विधायकों से जबरन इस्तीफों पर हस्ताक्षर करवाना असंभव है।