
अब नहीं देने होंगे पानी के टैंकर के ज्यादा पैसे, प्रशासन ने तय की दरें, ज्यादा वसूली हो तो यहां करें शिकायत
भवनेश गुप्ता / जयपुर। जिला प्रशासन ने पानी के निजी टैंकर संचालकों पर शिकंजा कस दिया है। निजी टैंकर संचालक अब न्यूनतम 180 रुपए और 20 किलोमीटर तक 312 रुपए तक ही प्रति टैंकर ले सकेंगे। इससे ज्यादा राशि लेने वाले टैंकर व ट्यूबवेल को अधिग्रहित किया जाएगा। हालांकि, इससे ज्यादा दूरी होने पर औसत दर से शुल्क लेने की छूट दी गई है। जलदाय विभाग की तमाम आपत्ति को दरकिनाकर कर जिला प्रशासन ने मंगलवार को यह दर प्रभावी कर दी है।
कलक्टर का कहना है कि जरूरत पडऩे पर रेसमा भी लागू किया जा सकता है। राजधानी में पहली बार है जब निजी टैंकर की दर प्रभावी की गई है। करीब तीन साल पहले भी यह कवायद हुई थी लेकिन टैंकर संचालकों के विरोध के चलते प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा था। संभागीय आयुक्त के.सी. वार्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक हुई। इसमें जिला प्रशासन के अलावा जलदाय विभाग के अधीक्षण व अधिशासी अभियंता को बुलाया गया। इसी बैठक में यह दर निर्धारित की गई।
यह दर की निर्धारित
दूरी—————————दर निर्धारित———अभी ले रहे
5 किलोमीटर ------------ 180 रुपए --------- 250 से 275 रुपए
5 से 10 किमी. ----------- 232 रुपए --------- 300 से 325 रुपए
10 से 15 किमी. ---------- 296 रुपए --------- 350 से 400 रुपए
15 से 20 किमी. ---------- 312 रुपए --------- 400 से 450 रुपए
(यह दर भवन परिसर में बने टैंक या हौद में आपूर्ति के लिए है। यदि भूतल से ऊंचाई पर पानी चढ़ाया जाता है तो अलग से शुल्क लिया जा सकेगा। अधिक दूरी होने पर औसत दर से शुल्क ले सकेंगे)
ठनी तो संभागीय आयुक्त तक पहुंचा मामला..
ट्यूबवेल अधिग्रहण और निजी टैंकरों की दर निर्धारित करने के मामले में कलक्टर व जलदाय विभाग के अधिकारियों के बीच ठनी हुई थी। जलदाय विभाग ने इससे हाथ खींच लिए थे। इसके बाद मामला और बढ़ गया। इस बीच संभागीय आयुक्त ने बैठक बुलाई। इसमें कलक्टर जगरूप सिंह यादव भी शामिल हुए।
यहां कर सकते हैं शिकायत..
निर्धारित दर से ज्यादा राशि लेने पर जनता जिला प्रशासन और जलदाय विभाग में शिकायत कर सकते हैं। जलदाय विभाग में 181 नम्बर और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूप मेें शिकायत करा सकेंगे। कलक्टर ने शिकायत पर कार्रवाई के लिए टीम भी बनाने के निर्देश दे दिए हैं।
30 प्रतिशत इलाके निजी ट्यूबवेल पर निर्भर
शहर का 30 प्रतिशत इलाके में सरकारी पेयजल सप्लाई नहीं है। यहां निजी टैंकर—ट्यूवबेल पर ही पेयजल सप्लाई की जा रही है। जलदाय विभाग कभी भी अधिग्रहण व दर निर्धारित करने के पक्ष में नहीं रहा। उलटे, इस पर आपत्ति जताता रहा। जिसका साइड इफेक्ट यह रहा कि टैंकर संचालक भी विरोध में उतरते रहे।
पेयजल किल्लत के बीच टैंकर संचालक बहुत ज्यादा राशि ले रहे थे। लोगों को राहत मिले इसके लिए दर निर्धारित की गई है। तय दर से ज्यादा राशि लेने पर अधिग्रहण करेंगे। जरूरत पड़ी तो रेसमा भी लागू कर सकते हैं। संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में ही दर तय की गई है।
—जगरूप सिंह यादव, कलक्टर
Published on:
12 Jun 2019 07:50 am
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