
प्रतीकात्मक तस्वीर
जयपुर। सहकारिता राज्यमंत्री गोतम कुमार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि प्रदेश की सहकारी संस्थाओं में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा चुनाव संपन्न कराने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण का गठन किया गया है।
राज्यमंत्री ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है तथा आवश्यकतानुसार पुलिस प्रशासन का सहयोग भी लिया जाता है। इसके अलावा, चुनाव में धांधली या अनियमितताओं की स्थिति में राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 की धारा 58 के तहत पंच निर्णायक नियुक्त किए जाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों में सदस्यता के लिए सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 एवं नियम 2003 में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई पात्र व्यक्ति समिति की सदस्यता के लिए आवेदन करता है और उसे अनुचित रूप से सदस्यता से वंचित किया जाता है, तो वह रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकता है।
इसके अलावा, विधायक सुभाष मील के मूल प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि जिन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में व्यवस्थापक के पद रिक्त हैं, वहां अन्य समितियों के व्यवस्थापकों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है या संविदा पर कर्मियों की नियुक्ति की जा रही है। जैसे ही रिक्त पदों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी, सहकारी भर्ती बोर्ड द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
Published on:
22 Mar 2025 12:35 pm
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