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वी कैन गिव दैम होप। इसी पंच लाइन को चरितार्थ करने आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की पत्नियां गुरुवार शाम चित्रकूट स्थित स्टेडियम के बाहर जुटीं। मौका था मुक्तांगन के उद्घाटन का। महिलाओं के इस ग्रुप (वी कैन गिव दैम होप) के जरिए जरूरतमंद लोगों को कपड़े, जूते व अन्य घरेलू सामान उपलब्ध हो सकेगा। यहां पर समर्थ लोग सामान दान भी कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्य सचिव की पत्नी सुचिता वैश ने फीता काट मुक्तांगन की शुरुआत की। शहर में यह छठा सेंटर है जहां पर जरूरतमंदों की मदद की जाएगी। इस दौरान स्थानीय पार्षद गजानंद यादव, सिविल लाइंस जोन के उपायुक्त सुनील पूनिया के साथ ग्रुप की महिलाएं भी मौजूद थी।
समाज में संतुलन कायम रहे प्रमुख सचिव (एलएसजी) मंजीत सिंह की पत्नी डॉ. रेखा सिंह के मुताबिक समाज में बहुत से लोग अत्यंत गरीब होते है। उनके पास गुजारे के लिए भी कुछ नहीं होता वहीं कई लोग सक्षम होते है। वे खुद के साथ दूसरों का भी भला कर सकते हैं। हम समाज के दोनों वर्गों के बीच संतुलन कायम करना चाहते है।
इसी उद्देश्य के साथ मुक्तांगन शुरू किया गया। मुक्त हाथ से रिक्त हाथ को सीएम सचिवालय में ओएसडी केके पाठक की पत्नी अपूर्वा का कहना था कि मुक्तांगन का अर्थ है मुक्त हाथ से रिक्त हाथ को वितरण।
हम चाहते है कि समाज में जो सक्षम है वे निस्वार्थ से आगे आएं और जरूरतमंदों की मदद करें। उनके मुताबिक यदि लोगों की तरफ से अच्छा रेस्पॉन्स रहा तो इस तरह के सेंटर जल्द ही पूरे प्रदेश में खोले जाएंगे।
नवम्बर में खोला था पहला सेंटर अतिरिक्त मुख्य सचिव (समाज कल्याण) अशोक जैन की पत्नी नीरू ने बताया कि हमने पिछले साल नवम्बर में शहर में पहला मुक्तांगन खोला था। चित्रकूट में ग्रुप का यह छठा सेंटर है।
इससे पहले जगतपुरा, मालवीय नगर, जवाहर नगर कच्ची बस्ती, विद्युत नगर शनि मंदिर, झालाना में ये खुल चुके है।
ग्रुप में ये शामिल पूर्व मुख्य सचिल अनिल वैश की पत्नी सुचिता वैश, अतिरिक्त मुख्य सचिव (समाज कल्याण) अशोक जैन की पत्नी नीरू जैन, डीजी पुलिस कपिल गर्ग की पत्नी रचना गर्ग, मध्यम-लघु उद्योग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरूप की पत्नी ईशा स्वरूप, प्रमुख सचिव (एलएसजी) मंजीत सिंह की पत्नी डॉ. रेखा सिंह, प्रमुख सचिव (एसईई) रजत मिश्रा की पत्नी शिबानी मिश्रा, नेशनल हैल्थ मिशन में डायरेक्टर नवीन जैन की पत्नी सुनीता जैन, सीएम सचिवालय में ओएसडी केके पाठक की पत्नी अपूर्वा पाठक, नेहा, सुंदरा बैंत यूं हुई शुरुआत पिछले साल मई में गोपालपुरा बायपास के आस-पास डायरिया फैला था। तब इस ग्रुप ने जयपुरिया हॉस्पिटल में लोगों को सैनेटाइज किट बांटे थे।
अभियान सफल रहा और प्रशंसा मिली तो आईएएस-आईपीएस की पत्नियों का हौसला बढ़ा। तभी से उन्होंने सामाजिक सरोकार से खुद को जोड़ लिया।
खास-खास -चित्रकूट स्थित सेंटर सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक खुलेगा। यहां कलेक्शन के साथ डिस्ट्रीब्यूशन भी होगा। झालाना, जवाहर नगर कच्ची बस्ती, विद्युत नगर में होता सिर्फ कपड़ों,सामान का वितरणस्वयं सेवकों की मदद से ये सेंटर्स संचालित हो रहे है।
Published on:
24 Mar 2017 08:36 am

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