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राजस्थान के ‘न्यू अमरीका’ में नहीं हैं एक भी कच्चा मकान

जोधपुर जिले के फलोदी के पास बसता है ‘न्यू अमरीका’। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन सच है। यहां के लोर्डिया गांव को ‘न्यू अमरीका’ के नाम से पहचाना जाता है। रेगिस्तान के इस गांव में कभी अभावग्रस्त जिन्दगी से ग्रामीण परेशान थे, लेकिन वर्ष 1951 की होली के दौरान आयोजित एक मुशायरे में ‘न्यू अमरीका’ नाम निकला। उसके बाद गांव की तस्वीर और तकदीर बदलती चली गई।

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जोधपुर जिले के फलोदी के पास बसता है ‘न्यू अमरीका’। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन सच है। यहां के लोर्डिया गांव को ‘न्यू अमरीका’ के नाम से पहचाना जाता है। रेगिस्तान के इस गांव में कभी अभावग्रस्त जिन्दगी से ग्रामीण परेशान थे, लेकिन वर्ष 1951 की होली के दौरान आयोजित एक मुशायरे में ‘न्यू अमरीका’ नाम निकला। उसके बाद गांव की तस्वीर और तकदीर बदलती चली गई।

इतिहासकारों के अनुसार जोधपुर जिले के लोर्डिया गांव का नाम ‘न्यू अमरीका’ के रूप में प्रचलित होने के पीछे वर्ष 1951 की होली पर गांव के दो राजनीतिक दलों की आपसी तुकबंदी और प्रतिस्पर्द्धा रही।

स्वतंत्रता सेनानी गोपीकिशन कठिन सरल जो कम्युनिष्ट नेता थे, उन्होंने चीन की बढ़ती ताकत का हवाला देकर अपनी कविता ‘चीन में बेली म्हारो रातों सूरज उगो रे...’ पढ़ी। उन्होंने लोर्डिया को ‘लालचीन’ नाम से सम्बोधित किया।

वहीं दूसरे दल के हीरालाल कल्ला, तुलसीदास कल्ला, शिवकरण करण बोहरा, बिलाकीदास बोहरा व बंशीलाल कल्ला ने चीन को पटखनी देने के लिए ताकत दिखा रहे अमरीका का उल्लेख कर लोर्डिया को ‘न्यू अमरीका’ नाम दे दिया, जो धीरे-धीरे इस गांव की पहचान बन गया।

आजादी के बाद गांव में दो विचारधाराओं के लोग थे। कम्युनिस्ट और नॉन कम्युनिस्ट। 1951 की होली के दिन हुए मुशायरे में लोर्डिया को ‘न्यू अमरीका’ के नाम से संबोधित किया गया, जो धीरे-धीरे प्रचलन में आता गया। -कन्हैयालाल जोशी, इतिहासकार व गांव के प्रथम शिक्षक

‘अमरीका’ नाम को साबित कर दिखाया

300 वर्ष पहले बसे इस गांव के नाम के साथ ‘अमरीका’ जुड़ने के बाद गांव की तस्वीर बदलने लगी। यहां के लोगों ने मेहनत के बूते गांव के विकास को नई दिशा दी। कई ग्रामीण खेतीबाड़ी में जुटे तो कुछ लोग मुम्बई गए और वहां व्यापार में सफलता प्राप्त की और कमाई का काफी हिस्सा गांव के विकास पर खर्च किया। गांव में तीन सरकारी स्कूल, 2 निजी स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, जीएसएस, सभी मोहल्लों में पक्की सड़कें, पर्याप्त रोशनी व्यवस्था, खेल मैदान, तालाब सहित कई सुविधाएं हैं। एक भी कच्चा मकान नहीं है।