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Rajasthan : पार्षदों, महापौर, सभापति के मानदेय-भत्तों में नहीं होगी बढ़ोत्तरी

स्वायत्त शासन विभाग के प्रस्ताव पर मंत्री की ना

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Rajasthan : पार्षदों, महापौर, सभापति के मानदेय-भत्तों में नहीं होगी बढ़ोत्तरी

Rajasthan : पार्षदों, महापौर, सभापति के मानदेय-भत्तों में नहीं होगी बढ़ोत्तरी

जयपुर। राज्य की शहरी सरकारों में महापौर, सभापति, पार्षदों के वेतन-भत्ते फिलहाल नहीं बढ़ेंगे। सरकार ने इसकी स्वीकृति नहीं दी है। स्वायत्त शासन विभाग ने मंत्री को बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भेजा था। इसके पीछे जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार मानदेय, भत्ते बढ़ाने की जरूरत को आधार बनाया गया। प्रस्ताव में पार्षदों के वाहन, स्टेशनरी भत्ते के अलावा बोर्ड बैठक के लिए पारिश्रमिक बढ़ोत्तरी और बोर्ड अध्यक्ष (महापौर, सभापति) का मानदेय बढ़ाने की जरूरत जताई गई थी। सूत्रों के मुताबिक सरकार का मानना है कि नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति पहले ही अच्छी नहीं है। ऐसे में और अधिक आर्थिक बोझ बढ़ने से स्थिति परेशान करने वाली होगी। राज्य में 213 नगरीय निकाय हैं।

पार्षद सदस्यों के लिए यह था बढ़ोत्तरी प्रस्ताव
1. नगर निगम— स्टेशनरी भत्ता 1200 रुपए, टेलीफोन 1500 व वाहन भत्ता 3000 रुपए प्रति माह। बोर्ड बैठक में शामिल होने वाले पर पारिश्रमिक 700 रुपए प्रति बैठक (अधिकतम 2100 रुपए प्रतिमाह)
2. नगर परिषद— स्टेशनरी भत्ता 900 रुपए, टेलीफोन 1000 व वाहन भत्ता 2000 रुपए प्रति माह। बोर्ड बैठक में शामिल होने वाले पर पारिश्रमिक 600 रुपए प्रति बैठक (अधिकतम 1800 रुपए प्रतिमाह)
3. नगर पालिका— स्टेशनरी भत्ता 700 रुपए, टेलीफोन 600 व वाहन भत्ता 1500 रुपए प्रति माह। बोर्ड बैठक में शामिल होने वाले पर पारिश्रमिक 500 रुपए प्रति बैठक (अधिकतम 1500 रुपए प्रतिमाह)

अभी यह है भत्ता
अभी नगरपालिका, नगर परिषद, नगर निगम में वाहन भत्ता 750, 1000, 1500 रुपए है। इसी तरह स्टेशनरी भत्ता 500, 600, 750 रुपए है। टेलीफोन भत्ते में कोई परिवर्तन प्रस्तावित नहीं किया गया था।

महापौर व सभापति के लिए (बोर्ड अध्यक्ष)
निकाय———अभी———बढ़ोत्तरी प्रस्ताव
नगर निगम— 20000— 25000
नगर परिषद— 12000— 15000
नगर पालिका— 7500— 10000
(आंकड़े रुपए में प्रतिमाह है)

वर्ष 2015 में हुई थी बढ़ोत्तरी
जनप्रतिनिधियों के मानदेय, भत्तों में अंतिम बढ़ोत्तरी वर्ष 2015 में हुई थी। पार्षद इस को भी आधार मानते हुए बढ़ोत्तरी की जरूरत जताते रहे। इसमें महंगाई मुख्य रूप से है। जयपुर नगर निगम ग्रेटर और नगर निगम हैरिटेज के बोर्ड ने पहले इसी तरह का प्रस्ताव सरकार को भेजा था।