कहने को तो गुलाबी नगरी के नाम से जयपुर विश्वविख्यात है, लेकिन शहर के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन से जब बाहर निकलते हैं तो सामने सब कुछ अस्त-व्यस्त नजर आता है। अव्यवस्था इतनी होती है कि लगता ही नहीं कि हम जयपुर में हैं। होना तो यह चाहिए कि यात्री रेलवे स्टेशन से बाहर आएं और मुस्कुरा कर सेल्फी लें और कहें क्या यही जयपुर है।
रेलवे स्टेशन को बाहर से खूबसूरत बनाने के लिए सिर्फ इच्छा शक्ति की कमी दिखाई देती है। ऐसा नहीं है कि सरकार स्टेशन के बाहर का नजारा नहीं बदल सकती। इसी सरकार ने पिछले कार्यकालों में कठपुतली नगर की समस्या को दूर कर चौड़ी सडक़ बनवाई और ऑपरेशन पिंक चलाकर परकोटे के बरामदों को अतिक्रमण से मुक्त कराया।
समझें महत्व
-01 लाख से अधिक यात्रियों की रोज होती है रेलवे स्टेशन पर आवाजाही
-1.25 लाख यात्री भार हो जाता है फेस्टिव सीजन के दौरान स्टेशन का
-200 से अधिक ट्रेनो का संचालन होता है जयपुर जंक्शन से
अभी ये हाल
-ऑटो वाले यात्रियों के इंतजार में मुख्य द्वार पर आकर खड़े हो जाते हैं। इससे अंदर जाने वाले वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
-रही-सही कसर ठेले वाले पूरी कर देते हैं। मुख्य द्वार के आस-पास 10 से 15 ठेले वाले खड़े रहते हैं।
-सिंधी कैम्प की ओर आने वाली सड़क पर कई ढाबे हैं। इन ढाबा संचालकों ने फुटपाथ पर अतिक्रमण कर रखा है और गाड़ियां सड़क पर खड़ी होती हैं। ऐसे में मुख्य सड़क संकरी हो जाती है।
-कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि स्टेशन से यात्री बाहर आते ही घर के लिए बस पकड़ना चाहता है लेकिन ई-रिक्शा और ऑटो की रेलमपेल में रास्ता ही भटक जाता है।
संकरी सड़क पर बैरिकेड्स, कैसे निकलें
-स्टेशन से राम मंदिर चौराहे को जाने वाली सड़क पहले से ही संकरी है और उसके बाद इस पर लगे बैरिकेड्स आने-जाने के लिए मुसीबत बने हुए हैं। जेडीए ने रेलवे प्रशासन से सड़क को चौड़ा करने के लिए जमीन मांगी, लेकिन रेलवे प्रशासन ने मना कर दिया। अभी स्टेशन परिसर को विकसित किया जा रहा है।
-संकरी सड़क होने की वजह से दिन भर जाम रहता है। सैन कॉलोनी के अलावा अन्य कॉलोनी के लोग आवाजाही के लिए परेशान हैं। बैरिकेड्स लगने से आस-पास व्यापार भी ठप हो गया है।