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टाइगर के बाद अब नया खतरा, जयपुर के पास गांवों में और फैली दहशत, ग्रामीण दे रहे रात-दिन पहरा

सरिस्का से जयपुर के जमवारामगढ़ पहुंचा बाघ एसटी-24 दो दिन से नहीं आया नजर, बाघ के आने से जंगल में दूसरे जानवरों में हड़कंप, बघेरा व जरख जंगल से बाहर आ रहे नजर

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jamwa ramgarh

टाइगर के बाद अब नया खतरा, जयपुर के पास गांवों में और फैली दहशत, ग्रामीण दे रहे रात-दिन पहरा

जयपुर। सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र के बफर जोन अजबगढ रेंज से जमवारामगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में आया बाघ एसटी-24 दो दिन से नजर नहीं आ रहा है। अंतिम बार साऊं व रामपुरावास रामगढ़ के बीच जंगल में 31 अगस्त को मूंडली तलाई पर एसटी-24 के पगमार्क मिले थे। विगत दो दिन से बाघ वन विभाग की टीमों को नजर नहीं आया।

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बाघ के साऊं, पापड़, सरजोली, ड्योडा डूंगर, रामपुरावास रामगढ़ व चूली बावड़ी के बीच सघन वन में निवास करने की जानकारी सामने आ रही है। बाघ की मौजूदगी से अन्य वन्यजीव भी भयभीत हैं। वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में बाघ एसटी-24 के आने से जरख, बघेरा आदि आस-पास के आबादी क्षेत्र में नजर आने लगे हैं। जिससे आस-पास के गांवों में दहशत और फैल गई है।

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दिन-रात दे रहे पहरा
बाघ और अन्य वन्यजीवों के गांव में आने के चलते ग्रामीण दिन और रात बारी-बारी से पहरेदारी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया 4-4 की टोली में घर से निकलते हैं। घर से निकलते समय हाथ में कुल्हाड़ी या डंडा जरूर रखते हैं। पहले जहां निश्चिंतता और बेफिक्री थी, अब चौबीस घंटे भय और आशंका है...पता नहीं कब, कौनसी झाड़ी में से निकलकर बाघ आ जाए!

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सूचना बाघ की मिला जरख
31 अगस्त को राहोरी में तथा एक सितंबर को चावंड का मंड गांव की लोहड़ी कोठी की ढाणी के पास बाघ आने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई थी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पगमार्क देखे तो जरख के होने का पता चला। सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र की टाइगर मॉनिटरिंग टीम सहित चार टीमें निगरानी में जुटी हैं। बाघ के मूवमेंट के चलते अभयारण्य क्षेत्र से सटे गांवों में दहशत का माहौल है।