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इनके जज्बे ने वेब दुनिया में मचाया तहलका

वेब तकनीक का आविष्कार करने वाले टिम बर्नर्स ली हैं, वेब जगत में इन्हें ‘वेब पितामह’ के नाम से जाना जाता है।

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इनके जज्बे ने वेब दुनिया में मचाया तहलका

इनके जज्बे ने वेब दुनिया में मचाया तहलका

इनका जन्म 1955 में इंग्लैंड में हुआ था। माता-पिता, दोनों ही गणितज्ञ थे और कंप्यूटर कंपनी में काम किया करते थे। इस तरह इन्हें घर पर सीखने और पढऩे का बहुत अच्छा माहौल मिला। बचपन में ही उनकी रुचि गणित में बढ़ गई थी। माता-पिता इन्हें छोटी-छोटी चीज में भी गण्ति का लॉजिक समझाया करते थे। मां और पिता को कंप्यूटर पर काम करता देख, कम उम्र में ही उनकी रुचि कंप्यूटर में भी बढ़ गई थी। प्राथमिक शिक्षा इन्होंने शीन माउंट प्राइमरी स्कूल से की। इसके बाद इन्होंने लंदन की एमानुएल स्कूल से आगे का अध्ययन किया। स्कूली शिक्षा के बाद इन्होंने क्वीन्स कॉलेज ऑफ ऑक्सफोर्ड में भौतिक विज्ञान में दाखिला लिया। गणित में इनकी रुचि बचपन से ही होने के कारण कॉलेज में भी इनका प्रदर्शन बेहतर रहा और इन्होंने 1976 में भौतिकी में प्रथम श्रेणी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
इंजीनियर की मिली पहली नौकरी
पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्हें एक दूरसंचार कंपनी में इंजीनियर के रूप में जॉब मिल गई। यहां इनका काम वितरित लेनदेन प्रणाली, संदेश रिले और बार कोड तकनीक पर काम करना था। लेकिन दो साल बाद ही इन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और नैश लिमिटेड में शामिल हो गए। इसके साथ ही इन्होंने स्वतंत्र सलाहकार के रूप में भी काम करना शुरू कर दिया था। सर्न सहित कई कंपनियों में सलाहकार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया। सर्न में रहते हुए इन्होंने अपने स्वयं के निजी उपयोग के लिए ‘इन्क्वायर’ नामक एक कार्यक्रम लिखा। 1981 में जॉन पॉल्स इमेज कंप्यूटर सिस्टम लिमिटेड में काम करना शुरू किया। अगले तीन सालों तक इन्होंने कंपनी के तकनीक पक्ष पर काम किया।
वेब की दुनिया में किया कमाल
यूरोपीय देशों की नाभिकीय प्रयोगशाला सर्न में इन्होंने 1984 में फेलो के रूप में काम करना शुरू किया। उस समय हजारों लोग सर्न में काम कर रहे थे। इनका काम अनुसंधानकर्ताओं तक सूचनाएं पहुंचाना था। इसी दौरान इनके दिमाग में एक विचार आया कि कुछ ऐसा तरीका निकाला जाना चाहिए कि एक ही जगह बैठकर सभी लोग इन सूचनाओं तक आसानी से पहुंच जाएं। इसके बाद ये नए-नए प्रयोगों में जुट गए और 1990 के आरंभ में उन्होंने वल्र्ड वाइड वेब का पहला वर्जन, पहला वेब ब्राउजर और पहला वेब सर्वर बना लिया। इस तरह वेब तकनीक का आविष्कार करने वाले ये व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि टिम बर्नर्स ली हैं। दुनिया का पहला वेब पेज 6 अगस्त 1991 में सर्न में बना। जब इन्होंने इस वेब तकनीक का आविष्कार किया, तब वे सर्न में ही थे, इसलिए यह तकनीक सर्न की बौद्धिक संपदा थी। 1993 में टिम के कहने पर सर्न ने इस तकनीक को मुफ्त कर दिया। टिम इसके बाद अमरीका चले गए और इन्होंने 1994 में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में विश्व व्यापी वेब संघ की स्थापना की। यह संघ वल्र्ड वाइड वेब गुणवत्ता को सुधारने और इनके मानवीकरण के काम में लगा हुआ है। टिम को 2001 में रॉयल सोसाइटी का सदस्य बनाया गया और 2004 में नाईटहुड की उपाधि मिली। आज ये 20वीं शताब्दी के 100 महान वैज्ञानिकों में शामिल हो चुके हैं। वेब जगत में इन्हें ‘वेब पितामह’ के नाम से जाना जाता है।