
तंबाकू है ओरल कैंसर का बड़ा जनक, लक्षणों को ना करें नजरअंदाज
जयपुर। मुंह के अंदर किसी भी प्रकार का बदलाव दिखे या फिर मुंह में होने वाली समस्या सही न हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लगभग 85 प्रतिशत मरीज तम्बाकू और उसके पदार्थो के सेवन के कारण इस बीमारी का शिकार बनते हैं। एपेक्स हॉस्पिटल में ”ओरल कैंसर अवेयरनेस ” (Oral Cancer Awareness) कार्यक्रम के दौरान एक्सपर्ट चिकित्सकों ने ये बात कही।
इस मौके पर चिकित्सकों ने कहा कि ओरल कैंसर (Oral Cancer) के अधिकतर मामले यूं तो पान-मसाला और गुटखा खाने वालो के ही होते हैं, लेकिन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण उन लोगो को भी मुंह का कैंसर हो सकता है जो तम्बाकू पदार्थो का सेवन नहीं करता। अवेयरनेस टॉक के दौरान मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रीती अग्रवाल, सर्जिकल ऑन्कॉलोजिस्ट डॉ. गौरव गोयल, डॉ. निखिल मेहता, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सोनू गोयल समेत अन्य एक्सपर्ट उपस्थित थे। चिकित्सको ने तम्बाकू उत्पादों से पूरी तरह परहेज रखने को कहा।
ये हैं मुंह और गर्दन के कैंसर के लक्षण
एक्सपर्ट चिकित्सकों ने बताया कि गले की खराश का 14 दिन तक ठीक ना होना, मुंह के नरम उतकों का लाल, सफेद या काला पड़ना, जबड़े में कोई छाला या उभार जो लंबे समय से दंत चिकित्सक से ठीक ना हो रहा हो, दो सप्ताह से अधिक समय तक गर्दन दर्द, भोजन निगलने में कठिनाई, आवाज का बदलना या कमजोर होना, मुंह से दुर्गंध आना आदि ओरल कैंसर के लक्षण (symptoms of oral cancer) हैं।
बायोप्सी जरूरी
कैंसर की बीमारी का संदेह होने पर चिकित्सक बायोप्सी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। बायोप्सी की सलाह तब दी जाती है, जब चिकित्सक को कुछ संदिग्ध लगे। बायोप्सी के कट से किसी प्रकार का संक्रमण नहीं फैलता है। इसके अतिरिक्त सीटी स्केन, पीईटी स्केन और एक्सरे और एमआरआई स्केन आदि किए जाते हैं।
उपचार संभव
चिकित्सकों ने बताया कि इस कैंसर का उपचार संभव है। कैंसर की स्टेज के अनुसार कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी आदि के संयोजन से काम से निजात दिलाई जा सकती है। मरीज के उपचार के बाद भी कुछ एहतियात बरतनी चाहिए। कई बार पर्याप्त मुंह ना खुलने पर थेरेपी देकर सिखाया जाता है। इलाज के बाद थेरेपी के जरिए व्यायाम, खाना घोटना आदि सिखाया जाता है।
Published on:
25 Apr 2022 11:42 pm
