26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गुर्जर-मीणा संघर्ष का गवाह रहा है राजस्थान का ये संसदीय क्षेत्र, आम चुनाव से पहले जानें किसका पलड़ा है भारी

क्या सचिन पायलट के गढ़ टोंक-सवाईमाधोपुर में कांग्रेस का पलड़ा भारी है?  

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Nidhi Mishra

Apr 28, 2019

tonk sawai madhopur constituency lok sabha election 2019

tonk sawai madhopur constituency lok sabha election 2019

जयपुर/ टोंक—सवाई माधोपुर। राजस्थान में सोमवार को पहले चरण के लोकसभा चुनाव 2019 ( Loksabha election 2019 in rajasthan ) होने हैं। इसे लेकर राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हैं। जब देश के सभी राज्यों में नए समीकरण के हिसाब से राजनीतिक गोलबंदी जारी है, तब राजस्थान भी भला इससे अछूता कैसे रह सकता है। आम चुनाव के चौथे चरण में राजस्थान भी शामिल है। बता दें कि लोकसभा चुनाव ( Loksabha election 2019 ) से कुछ समय पहले आरक्षण की मांग लेकर गुर्जर आंदोलित ( gurjar aandolan ) हुए थे, तो राज्य की नवगठित गहलोत सरकार ( rajasthan ashok gehlot government ) को भी उनकी मांगें माननी पड़ी थीं। राजस्थान का टोंक और सवाईमाधोपुर जिला ( tonk sawai madhopur constituency ) शुरू से ही गुर्जर-मीणा संघर्ष का गवाह रहा है।


आपको बता दें कि 2008 के परिसीमन के बाद टोंक-सवाईमाधोपुर सीट अस्तित्व में आई। इस सीट को टोंक जिले की 4 और सवाईमाधोपुर जिले की 4 विधानसभा सीटों को मिलाकर बनाया गया है। सुखबीर सिंह जौनपुरिया ( bjp mp sukhbir singh jaunapuria ) यहां के निवर्तमान सांसद हैं।

सूबे का ये इलाका दो मार्शल कौम गुर्जर और मीणा के संघर्ष का हमेशा से गवाह रहा है। जाहिर तौर पर 2008 के परिसीमन के बाद इस क्षेत्र के अस्तित्व में आने के बाद पहले आम चुनाव में गुर्जर और मीणा संघर्ष की साफ झलक दिखी। जब यहां गुर्जर समाज के बड़े नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ( col kirodi singh bainsla ) और कांग्रेस के नमो नारायण मीणा ( namo narayan meena ) के बीच मुकाबला देखने को मिला। इस चुनाव में कांग्रेस के नमो नारायण मीणा ने को कामयाबी मिली।


लेकिन अगले आम चुनावों में साल 2014 की मोदी लहर में कांग्रेस के हाथ से ये सीट फिसल गई। टोंक-सवाईमाधोपुर में हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारक और उत्तरप्रदेश से सांसद रहे पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन को प्रत्याशी बनाया था, तो वहीं बीजेपी ने यहां से अपना उम्मीदवार बदल दिया था। बीजेपी ने यहां से गुर्जर उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर विश्वास जताया। जौनपुरिया ने पार्टी के विश्वास को बनाए रखते हुए अजहरुद्दीन को पटखनी दी। उधर, किरोणी लाल मीणा की एनपीईपी भी तीसरे स्थान पर पहुंच गई।


इसलिए अहम ये सीट
ये सीट ऐतिहासिक महत्व रखती है और वो भी सवाईमाधोपुर के कारण अहम है। सवाईमाधोपुर का इतिहास भी यहां के रणथम्भौर किले के आस पास ही घूमता है। वहीं रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की वजह से भी ये इलाका महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि पूरे भारत में इसकी पहचान बाघों के लिए है। सवाईमाधोपुर की स्थापना जयपुर से महाराजा सवाई माधो सिंह ने की थी और जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीयाकुमारी सवाईमाधोपुर से विधायक भी रहीं हैं। फिलहाल दीयाकुमारी राजसमंद से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं।


टोंक—सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट में 2011 की जनसंख्या के मुताबिक
— आबादी 27,56,877
— 78.81 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 21.19 प्रतिशत हिस्सा शहरी
— कुल आबादी का 20.56 फीसदी अनुसूचित जाति और 16.83 फीसदी अनुसूचित जनजाति
— मुस्लिम, गुर्जर और मीणा मतदाताओं का प्रभाव ज्यादा
— एससी, ब्राह्मण, माली और राजपूत समाज का प्रभाव
— सवाईमाधोपुर जिले की गंगापुर, बामनवास, सवाईमाधोपुर, खंडर विधानसभाएं
— टोंक जिले की मालपुरा, निवाई, टोंक और देवली-उनियारा विधानसभा शामिल
— विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस 8 सीटों में से 6 सीट जीती
— गंगापुर सीट पर निर्दलीय और मालपुरा सीट पर बीजेपी की जीत हुई


लोकसभा चुनाव 2014: एक नजर
पिछली बार लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 61 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं 22 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इस प्रतिशत में से बीजेपी को 52.6 फीसदी और कांग्रेस को 39.6 फीसदी वोट मिले। बीजेपी से सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कांग्रेस से मोहम्मद अजहरुद्दीन को 1,35,311 मतों से हराया था। जौनपुरिया को 5,48,179 और अजहरुद्दीन को 4,12,868 वोट मिले थे। इस बार बीजेपी से सुखबीर सिंह जौनपुरिया और कांग्रेस से नमो नारायण मीणा यहां से आमने सामने हैं।

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग