अरविन्द सिंह शक्तावत
प्रदेश में रिसर्जेंट राजस्थान में अपने विभाग को आगे रखने की एेसी होड़ मची हुई है कि कई माह पुरानी उन परियोजनाओं को भी शामिल कर लिया गया है, जिनको पहले ही अप्रूवल मिल चुकी है। पर्यटन विभाग ने एेसे 102 एमओयूू किए हैं। इन एमओयू से प्रदेश में 3928 करोड़ रुपए के निवेश की बात की जा रही है। इन सभी 102 परियोजनाओं को पर्यटन विभाग पहले ही अप्रूवल दे चुका है।
अब रिसर्जेंट में दिखाने के लिए इन परियोजनाओं के प्रतिनिधियों से एमआेयू किया जा रहा है। पर्यटन विभाग ने चार एवं पांच नवम्बर को शहर की दो सितारा होटलों में ये एमओयू किए थे। चार नवम्बर को दस करोड़ से कम कीमत के और पांच नवम्बर को दस करोड़ रुपए से ज्यादा की कीमत के प्रोजेक्टों के लिए एमओयू किए गए थे। पांच नवम्बर को हुए कार्यक्रम में तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केन्द्रीय पर्यटन राज्य मंत्री महेश शर्मा भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक विभाग इन सभी को काफी पहले ही अप्रूवल दे चुका है और यह परियोजनाएं किसी शहर में नगर निगम तो कहीं जेडीए औैर किसी जिले में कलक्टर के यहां स्वीकृति के लिए पड़ी हैं।
ये एमओयू नए
सूत्रों के अनुसार पर्यटन विभाग ने 16 नवम्बर को जो एमओयू किए हैं, वही नए हैं। विभाग ने इस दिन 2349 करोड़ रुपए के 37 एमओयू किए थे, जिनसे 6670 हजार लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है।
काम शुरू नहीं, इसलिए दुबारा एमओयू
यह बात सही है कि कुछ परियोजनाएं पुरानी हैं। इनको पर्यटन विभाग अप्रूवल दे चुका था, लेकिन यह लोग काम शुरू नहीं कर पाए थे। अब यह दुबारा आए हैं, इसलिए एमओयू किया गया है।अनिल चपलोत, निदेशक, पर्यटन विभाग
यूं लूटी वाहवाही
चार नवम्बर को रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में विभाग ने दस करोड़ से कम कीमत के 57 एमओयू किए गए। इन एमओयू से 229 करोड़ रुपए के निवेश आने और 2265 लोगों को रोजगार देने की बात की गई है। यह सभी परियोजनाएं पर्यटन विभाग पहले से ही स्वीकृत कर चुका है।
पांच नवम्बर को जेएलएन मार्ग स्थित एक होटल में विभाग ने दस करोड़ से ज्यादा की कीमत के 45 एमओयू किए गए हैं। इन एमओयू से प्रदेश में 3698 करोड़ रुपए के निवेश आने और 11653 लोगों को रोजगार देने की बात की गई है। इन सभी 45 परियोजनाओं को पर्यटन की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।
परेशानी न हो इसलिए आए एमओयू करने
झुंझुनंू जिले में एक होटल बनाने वाले व्यक्ति से बात की तो उसका कहना था कि पर्यटन विभाग होटल की पहले ही मंजूरी दे चुका है। स्थानीय प्रशासन से जो काम होने हैं, उसमें परेशान ना किया जाए और तय प्रक्रिया के तहत काम हो जाए। इसलिए एमओयू करना पड़ा है।