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जाम से जंग में पुलिस के सिपहसालार बने ट्रैफिक मार्शल

जयपुर

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Lalit Tiwari

Jan 22, 2026

जयपुर. जाम से जंग में जयपुर की ट्रैफिक पुलिस को ट्रैफिक मार्शल के रूप में स्वयंसेवी सिपहसालार मिल गए हैं। सुबह-शाम चार घंटे, बिना वेतन, सिर्फ सेवा भाव से ये लोग शहर की रफ्तार को संभाल रहे हैं। महिलाएं, युवा और ग्रामीण परिवेश से आए लोग भी इस कारवां का हिस्सा हैं। पहले इनकी संख्या 67 थी, अब शहरभर में 204 ट्रैफिक मार्शल मोर्चा संभाल रहे हैं। तीन दिन की ट्रेनिंग के बाद इन्हें फील्ड में उतारा जाता है, ताकि लालबत्ती-नीली बत्ती का अर्थ समझा सकें और जाम में फंसी सांसों को राहत दे सकें। जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था अब इन मार्शलों की मेहनत से नई राह पा रही है।

तीन दिन विशेष प्रशिक्षण जरूरीट्रैफिक मार्शल बनने से पहले सभी स्वयंसेवकों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। पहले डीसीपी ट्रैफिक की ओर से इंटरव्यू लिया जाता है। सेलेक्ट होने पर प्रशिक्षण यातायात पुलिस की एजुकेशन शाखा की ओर से आयोजित होता है। प्रशिक्षण में उन्हें लालबत्ती-नीली बत्ती का अर्थ, यातायात संकेतकों की जानकारी, सड़क सुरक्षा के नियम और जाम की स्थिति में ट्रैफिक को किस तरह नियंत्रित करना है, इसकी व्यवहारिक ट्रेनिंग दी जाती है। तीन दिन की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही मार्शलों को फील्ड में उतारा जाता है।युवा, महिलाएं और ग्रामीण परिवेश से आए लोग भी शामिल

ट्रैफिक मार्शलों में युवाओं के साथ-साथ महिलाएं भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही हैं। कई ट्रैफिक मार्शल ग्रामीण परिवेश से भी आए हैं, जो शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने में योगदान दे रहे हैं। कई मार्शलों को उनके घर के पास ही ड्यूटी प्वाइंट दिए जाते हैं, ताकि उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो। वहीं कुछ ऐसे समर्पित लोग भी हैं, जो शहर में कहीं भी ड्यूटी करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसे मार्शलों को उन स्थानों पर लगाया जाता है, जहां जाम और यातायात की समस्या अधिक रहती है।

ट्रैफिक पुलिस को मिल रहा सहयोगट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के अनुसार ट्रैफिक मार्शलों के कारण न केवल ट्रैफिक पुलिस का दबाव कम हुआ है, बल्कि जाम की स्थिति में ट्रैफिक को तेजी से रेगुलेट करने में भी मदद मिल रही है। आमजन को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है और सड़कों पर अव्यवस्था में कमी आई है।

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ट्रैफिक मार्शल व्यवस्था जयपुर की यातायात प्रणाली को मजबूत बना रही है। भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ाने की योजना है, ताकि शहर को जाम मुक्त बनाने की दिशा में और प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

सुमित मेहरड़ा, डीसीपी, ट्रैफिक