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उपेक्षा का शिकार स्टेट हाईवे, पानी और कीचड़ के बीच से गुजरने को मजबूर राहगीर

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जयपुर

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Newsdesk

Jul 23, 2026

Rajasthan

6 साल से जलभराव, कपड़े खराब कर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल



पचेवर. पंचायत समिति क्षेत्र में आने वाले पारली गांव विकास और सुगम सफर के दावों की पोल खोलता एक नजारा कस्बे के पास से गुजर रहे स्टेट हाईवे 37-ए- पर पिछले छह वर्षों से बदस्तूर जारी है। पचेवर के पारली गांव स्थित बस स्टैंड से महज 300 मीटर की दूरी तक हाईवे पानी और कीचड़ से अटा पड़ा है। नालियों का अभाव और जिम्मेदार विभागों की घोर लापरवाही का खामियाजा प्रतिदिन सैकड़ों राहगीरों, वाहन चालकों और मासूम स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जलभराव वाले इस स्थान के ठीक पास में ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित है। हर सुबह मासूम बच्चे अपने घरों से साफ-सुथरी और सुव्यवस्थित ड्रेस पहनकर उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में स्कूल के लिए निकलते हैं। लेकिन स्कूल के मुख्य रास्ते पर पसरे कीचड़ के कारण मंजिल तक पहुंचने से पहले ही उनके कपड़े और बैग गंदे हो जाते हैं। कई बार फिसलने से बच्चों को चोटें भी आई हैं।
हादसों को न्योता देता मार्ग
ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए बताया कि समस्या बीते छह सालों से जस की तस बनी हुई है। नालियों की निकासी व्यवस्था न होने से सड़कों पर जमा गंदा पानी अब स्थाई बन चुका है। सबसे ज्यादा दुर्गति दोपहिया वाहन चालकों की होती है। पानी गहरा होने और गड्ढों का पता न चलने के कारण आए दिन बाइक व स्कूटी सवार अनियंत्रित होकर कीचड़ में गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं।
अधिकारी भी गुजरते हैं, फिर भी आंखें मूंदे बैठा प्रशासन
ग्रामीणों का आरोप है कि इसी स्टेट हाईवे 37-ए- से होकर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की गाड़ियां दिन में कई बार गुजरती हैं। आँखों के सामने समस्या होने के बावजूद अधिकारी इस ओर से मुंह मोड़ लेते हैं। प्रशासनिक उदासीनता के चलते गांव के लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
ग्रामीणों की मांग: जल्द बने नाली, मिले जलभराव से निजात
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्टेट हाईवे के दोनों ओर तुरंत पक्की नालियों का निर्माण कराया जाए और जर्जर सड़क को दुरुस्त किया जाए। यदि शीघ्र ही समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकाला गया, तो ग्रामीणों को उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

फोटो पचेवर क्षेत्र के पारली पंचायत सड़क मार्ग पर भरा पानी व कीचड़।