
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज और दवा दुकानों से नि:शुल्क दवाइयां नहीं मिलने से कर्मचारियों में आक्रोश है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि कर्मचारियों के वेतन से हर माह 700-800 रुपए की कटौती आरजीएचएस खाते के लिए की जाती है। लेकिन इसके बाद भी कर्मचारियों और उनके परिजन को इलाज और दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है।
आरजीएचएस की सुविधा नहीं मिलने पर कर्मचारी और उनके परिजन को नकद राशि देकर इलाज करवाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि महासंघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव को पूरे मामले से अवगत कराएगा। राठौड़ ने आरोप लगाया कि नवनियुक्त सरकार के प्रति आक्रोश पैदा करने के लिए जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। नर्सेज पदाधिकारियों ने आरजीएचएस के तहत पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारियों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्यारेलाल चौधरी और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्रसिंह शेखावत ने कहा कि वेतन से करोड़ों रुपए की कटौती किए जाने के बावजूद नि:शुल्क इलाज नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छह माह से कर्मचारी और पेंशनर परेशान हैं। न तो सूचीबद्ध अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज होता है और न ही डॉक्टर की लिखी दवा नि:शुल्क दी जा रही है। पुनर्भरण नहीं होने से भी कई कार्मिक व पेंशनर परेशान हैं।
ये दवाइयां भी खुद खरीदनी पड़ रही
बीमार व्यक्ति को विटामिन, आयरन और कैल्शियम सहित विभिन्न मिनरल लिखे जाते हैं। जिसकी बीमारी के दौरान आवश्यकता होती है, लेकिन उनका भुगतान राज्य सरकार की ओर से दवा विक्रेताओं को नहीं किए जाने से ये दवाइयां भी मरीज को खुद खरीदनी पड़ रही है।
Published on:
23 Dec 2023 11:35 am
