
jkk
जवाहर कला केन्द्र में जहां अदिति मंगलदास कंपनी की ओर से नृत्य प्रस्तुति ने समय के महत्व के बारे में बताया, वहीं रंगायन सभागार में खेले गए नाटक 'तिलचट्टे की डायरी में किसानों के दर्द को बयां किया गया। थिएटर के अनुभवों के साथ सीनियर एक्टर कुमुद मिश्रा और शीबा चड्ढा 'मीट द आर्टिस्ट में ऑडियंस से रूबरू हुए। दर्शकों के लिहाज से पूरा दिन नृत्य, थिएटर और अनुभव की त्रिवेणी के रूप में यादगार बना।
भविष्य की समस्याओं को दर्शाता नाटक
सुखेश अरोड़ा की परिकल्पना-निर्देशित 'तिलचट्टे की डायरी के जरिए कलाकारों ने भविष्य में होने वाले जलवायु परिवर्तन पर विचार करने और वातावरण की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने के बारे में अवगत कराया। इम्प्रोवाइजेशन से तैयार नाटक को एक प्रयोग के रूप में पेश किया गया।
इसमें दो तिलचट्टे, एक मुर्गा, एक किसान, एक नवयुवती और दो नवयुवक से जुड़े मुद्दों को उठाया गया और संवाद दर संवाद कहानी को आगे बढ़ाया गया। हालांकि दर्शकों के लिहाज से ना ही कहानी ने अट्रैक्ट किया और ना ही कुछ अलग दिखाने ने। कलाकारों की एनर्जी और इम्प्रोवाइजेशन से बनी कॉमिक टाइमिंग ने जरूर हंसाया।
नाटक में बताया गया कि किस प्रकार से मनुष्य और अन्य प्राणियों का जीवन एक-दूसरे को प्रभावित करता है। नाटक में अनुरंजन शर्मा, देवेंद्र सिंह भाटी, लोकेंद्र सिंह राठौड़, पद्मजा, शुभम पारीक एवं सुदर्शिनी माथुर शामिल थे।
Published on:
25 Mar 2017 10:12 am
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
