Rajasthan News : राजस्थान में खरीदे जा रहे ट्रकों का नगालैंड में फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। टैक्स बचाने के लिए ट्रांसपोर्टर्स हेरफेर कर रहे हैं। नगालैंड में फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर राजस्थान में ट्रकों को दौड़ाया जा रहा है। राजस्थान पत्रिका ने इस पूरे मामले की पड़ताल की। इस दौरान नगालैंड में एक दलाल से संपर्क कर फर्जी तरीके से ट्रकों का रजिस्ट्रेशन करवाने की बात की।
विजय शर्मा
जयपुर। राजस्थान में खरीदे जा रहे ट्रकों का नगालैंड में फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। टैक्स बचाने के लिए ट्रांसपोर्टर्स हेरफेर कर रहे हैं। नगालैंड में फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर राजस्थान में ट्रकों को दौड़ाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात है कि नियमानुसार नगालैंड में काम करने वाली कंपनी या मूल निवासी होने पर ही वहां वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है लेकिन फर्जी किरायानामा लगाकर ट्रकों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।
राजस्थान पत्रिका ने इस पूरे मामले की पड़ताल की। इस दौरान नगालैंड में एक दलाल से संपर्क कर फर्जी तरीके से ट्रकों का रजिस्ट्रेशन करवाने की बात की। दलाल ने 60 हजार रुपए में मोबाइल पर ही दस्तावेज भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने की डील की।
पत्रिका: अपनी गाड़ियां हैं, उनका एनएल नंबर में रजिस्ट्रेशन कराना है
दलाल: आप गाड़ी के कागज भेज दें, मैं देख लेता हूं
पत्रिका: पुरानी गाड़ियों को भी सरेंडर कराकर रजिस्ट्रेशन लेना हैं, नगालैंड का
दलाल: आपको आरटीओ में आरसी सरेंडर करके एनओसी भिजवानी पड़ेगी, एनओसी कोहिमा आरटीओ के नाम निकलवाना
पत्रिका: खर्चा कितना लग जाएगा, क्या भेजना पड़ेगा
दलाल: गाड़ी नई है तो बीमा, अस्थायी आरसी और आइडी प्रूफ भेजना होगा, खर्चा 60 हजार रुपए तक आएगा
पत्रिका: नगालैंड का कितना टैक्स लग जाता है
दलाल: राजस्थान से तो बहुत ही कम है, 10 हजार रुपए सालाना लगता है।
पत्रिका: अगर पुरानी गाड़ी का वापस रजिस्ट्रेशन कराएं तो कितना खर्चा आएगा
दलाल: पुरानी गाड़ी भी हो जाएगी, 22 चक्का का 70 हजार रुपए तक लग जाएगा
पत्रिका: नगालैंड का एड्रेस प्रूफ कैसे लेंगे, हमारे पास कुछ नहीं है
दलाल: यहां के किरायानामा पर रजिस्ट्रेशन करा दूंगा, दस्तावेज मोबाइल पर भेज दूंगा
राजस्थान में ऐसे वाहनों की संख्या अधिक है, ऐसे में इन वाहनों के खिलाफ अभियान चलाएंगे। इसी के साथ नगालैंड की सरकार को इस संबंध में पत्र भेजेंगे।
-श्रेया गुहा, एसीएस परिवहन विभाग
राजस्थान में भारी वाहनों का अलग -अलग मॉडल के हिसाब से सालाना टैक्स लिया जाता है। राजस्थान में एक ट्रक का करीब 35 हजार रुपए तक सालाना टैक्स लिया जा रहा है। जबकि नागालैंड में इसी टैक्स के महज 10 हजार रुपए तक लिए जा रहे हैं। ऐसे में सीधे तौर पर हो रही 25 हजार रुपए तक की बचत इस फर्जीवाड़े को बढ़ावा देे रही है।
राज्य के वाहनों का नगालैंड में रजिस्ट्रेशन होने पर परिवहन विभाग को ही चूना लग रहा है। परिवहन विभाग के पास आने वाला राजस्व दूसरे राज्यों में जा रहा है। इसकी खबर होने के बाद भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जयपुर की सड़कों पर ही बड़ी संख्या में नगालैंड नंबर के ट्रक दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। फर्जी रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी विभाग जांच करना तक उचित नहीं समझता।
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