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Rajasthan News : ब्लड से लेकर प्लाज़्मा तक, मोटी रकम में बिक रहा डोनेशन का खून, पत्रिका का बड़ा खुलासा

Rajasthan News : राजस्थान के कुछ निजी ब्लड बैंकों ने रक्तदान शिविरों से मिले रक्त में से निकाले गए प्लाज्मा का कारोबार में जमकर उपयोग किया है। जेकेलोन अस्पताल में प्लाज्मा निजी ब्लड बैंक को बेचने का खुलासा होने के बाद राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि राज्य के कुछ ब्लड बैंकों ने 90 प्रतिशत तक प्लाज्मा निजी कंपनियों को दवाइयां बनाने के लिए बेचकर मोटा मुनाफा कमाया।

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विकास जैन
Jaipur News : प्रदेश के कुछ निजी ब्लड बैंकों ने रक्तदान शिविरों से मिले रक्त में से निकाले गए प्लाज्मा का कारोबार में जमकर उपयोग किया है। जेकेलोन अस्पताल में प्लाज्मा निजी ब्लड बैंक को बेचने का खुलासा होने के बाद राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि राज्य के कुछ ब्लड बैंकों ने 90 प्रतिशत तक प्लाज्मा निजी कंपनियों को दवाइयां बनाने के लिए बेचकर मोटा मुनाफा कमाया। प्रदेश में अभी 224 ब्लड बैंक हैं, जिनमें 59 सरकारी और 165 निजी हैं।

आंकड़ों को देखें तो 70 ब्लड बैंकों ने रक्तदान शिविरों से लिए गए रक्त से प्लाज्मा बनाया और 40 प्रतिशत ही मरीजों को दिया। इनमें से अधिकांश ब्लड बैंक पिछले पांच से सात वर्ष के दौरान खुले हैं। औसतन 60 प्रतिशत से ज्यादा कंपनियों को बेचा गया। सवाईमानसिंह अस्पताल में यह प्रतिशत 15 से 20 प्रतिशत ही है।

70 फीसदी देना होता है मरीजों को

ब्लड बैंकों को प्लाज्मा का 70 प्रतिशत तक मरीजों को देना होता है जबकि अमूमन ऐसा नहीं हो रहा है। 90 प्रतिशत तक इसे दवाइयां बनाने के लिए बेचा जा रहा है। भारत सरकार के निर्देशानुसार ब्लड बैंक मरीजों को देने के बाद बचे हुए प्लाज्मा को दवा बनाने वाली कंपनियों को दे सकते हैं। जिसके लिए कंपनियों को लाइसेंस दिया जाता है।

सरकार जांच करे तो खुलेंगी परतें

पड़ताल में सामने आया कि उदयपुर, कोटा, सूरतगढ़, सीकर, सांगानेर जयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, मुरलीपुरा जयपुर, झुंझुनूं, झालावाड़, जयपुर, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर और भीलवाड़ा के कुछ ब्लड बैंकों ने 75 से 100 प्रतिशत तक प्लाज्मा बेच दिया। सरकार जांच करे तो कई परतें खुल सकती हैं।

कमेटी कितनी सच्चाई ला पाएगी सामने

जेके लोन अस्पताल में प्लाज्मा बेचने का मामला सामने आने के बाद अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने प्रदेश भर में स्थित सभी सरकारी व निजी ब्लड बैंकों की जांच के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि एसीएस 29 अप्रेल को हुई एक मीटिंग में भी अभियान चलाने के लिए कह चुकी हैं।

पहले भी सामने आया रक्त का काला कारोबार

दो साल पहले वर्ष 2022 और सितंबर 2021 में भी मुनाफाखोरी के लिए दान से मिले खून में सेनाइल वाटर मिलाकर उसे दोगुना करने का मामला सामने आ चुका है। तब खुलासा हुआ था कि राजस्थान से दान करवा उत्तरप्रदेश में मिलावट करने के बाद रक्त को ऊंचे दाम पर बेचा जाता था। जयपुर, चौमूं और सीकर के 8 ब्लड बैंकों के टेक्नीशियनों से 700-800 रुपए में खरीदकर ले जाने का खुलासा उत्तरप्रदेश एसटीएफ और ड्रग विभाग ने किया था। गिरोह का नेटवर्क सात राज्यों में फैला हुआ था। छापेमारी में राजस्थान से तस्करी कर लाया गया 302 यूनिट घटिया मानव रक्त (ब्लड) बरामद किया गया। तब इसमें प्रदेश के कई ब्लड बैंकों के नाम सामने आए थे।

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