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शहर की सफाई का सच : कहीं टूटे तो कहीं कचरे से भरे डस्टबिन

स्वच्छता सर्वे के दौरान लगाए गए डस्टबिन टूट गए हैं तो अधिकतर जगह कचरे से भरे हैं

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cleaning of the city

जयपुर . स्वच्छता सर्वे के दौरान लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए डस्टबिन देखरेख के अभाव में कहीं कचरे से भरे रहते हैं तो कहीं पर टूट गए हैं। टूटे डस्टबिन से बाहर निकलता कचरा नगर निगम की लचर कार्यशैली को दर्शा रहा है। स्वच्छता सर्वे पूरा होने के साथ ही निगम की लापरवाही एक बार फिर उजागर होने लग गई है। व्यापारी परेशान हैं और उनकी सुनवाई नहीं होती। नगर निगम की ओर से बाजारों और प्रमुख मार्गों पर स्वच्छता सर्वे के दौरान गीला और सूखा कचरा डालने के लिए दो अलग-अलग डस्टबिन लगाए गए थे। टोंक रोड पर आदर्श बाजार, टोंक फाटक, करतारपुरा, बरकत नगर में ये डस्टबिन रखे गए। शुरुआत में तो इनकी सफाई होती रही और जैसे ही स्वच्छता सर्वे का समय पूरा हुआ हाल वही होने लगा जिसका अनुमान था। डस्टबिन कचरे से भरे नजर आने लगे और एक-दो स्थानों पर तो ये टूट भी गए।

एक भी दिन सफाई नहीं तो ओवरफ्लो

इन डस्टबिन को बाजारों में लगा तो दिया पर इनका आम आदमी कम दुकानदार ज्यादा उपयोग करते है। हाल ये है ज्यूस की दुकान के बाहर लगे डस्टबिन यदि निगम की गाड़ी कचरा लेने नहीं आई तो सड़क पर कचरा फैल जाता है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में लगे डस्टबिन की दिन में तीन बार सफाई होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होगा तो कचरा इतना होता है कि ये ओवरफ्लो हो जाएंगे।

दिनभर कचरे से परेशानी

आदर्श बाजार में गली नंबर 21 के बाहर डस्टबिन का हाल ये हो गया कि वह पूरी तरह टूटा हुआ है और कचरा बाहर तक निकलता रहता है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि दिनभर कचरा दुर्गंध मारता है। बहुत परेशानी हो रही है, लेकिन न तो इसे हटाया जा रहा और न ही बदला जा रहा।

आदर्श बाजार व्यापार मंडल के महामंत्री अजय मिश्रा निगम ने डस्टबिन तो लगा दिए पर इनकी सफाई रोजाना नहीं हो पाती। यदि समय से सफाई हों तो ये भरे नहीं। जो डस्टबिन टूट गए या गल गए उनको बदलना चाहिए। ऐसे कचरा-पात्र में कचरा रुकता नहीं और वह बाहर आ जाता है।

स्थानीय निवासी जितेन्द्र पाटोदी ने बताया की निगम ने बाजार में जो डस्टबिन लगाए यह अच्छी बात है पर इनकी साइज छोटी होने के कारण ये थोड़े से ही कचरे से भर जाते हैं और व्यापारियों को परेशानी होती है। कचरा रोजाना और समय से उठना चाहिए।