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नि:शुल्क चिकित्सा कैंप लगाने वाले ट्रस्ट नहीं बच सकते जिम्मेदारी से:राज्य उपभोक्ता आयोग

State consumer commission) राज्य उपभोक्ता आयोग ने (neglience in treatment) इलाज में लापरवाही के एक मामले में कहा है कि (free medical camps) नि:शुल्क चिकित्सा कैंप लगाने वाले (Trusts) ट्रस्ट भी (consumer) उपभोक्ता के प्रति अपनी (responsibility) जिम्मेदारी से नहीं बच सकते और (govt Hospitals) सरकारी अस्पताल भी (medical neglienece) चिकित्सकीय लापरवाही के लिए (responsible) जिम्मेदार हैं।

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नि:शुल्क चिकित्सा कैंप लगाने वाले ट्रस्ट नहीं बच सकते जिम्मेदारी से:राज्य उपभोक्ता आयोग

नि:शुल्क चिकित्सा कैंप लगाने वाले ट्रस्ट नहीं बच सकते जिम्मेदारी से:राज्य उपभोक्ता आयोग

जयपुर

(State consumer commission) राज्य उपभोक्ता आयोग ने (neglience in treatment) इलाज में लापरवाही के एक मामले में कहा है कि (free medical camps) नि:शुल्क चिकित्सा कैंप लगाने वाले (Trusts) ट्रस्ट भी (consumer) उपभोक्ता के प्रति अपनी (responsibility) जिम्मेदारी से नहीं बच सकते और (govt Hospitals) सरकारी अस्पताल भी (medical neglienece) चिकित्सकीय लापरवाही के लिए (responsible) जिम्मेदार हैं। आयोग ने कहा कि निशुल्क कैंप आयोजकों को यह देखना चाहिए कि क्या मरीजों का इलाज सही चिकित्सा प्रणाली से हो रहा है या नहीं और मरीजों के आॅपरेशन व इलाज के लिए अपनाई जा रही तकनीक सुरक्षित है या नहीं।
आयोग के न्यायिक सदस्य के.के.बागड़ी और सदस्य रामफूल गुर्जर ने यह आदेश चित्तौड़ जिला उपभोक्ता मंच के तीन लाख हजार रुपए जुर्माने के फैसले को बरकरार रखते हुए रतेन्द्र हिरावत हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर की अपील खारिज करते हुए दिया। अपील में कहा था कि ट्रस्ट ने भ्रमणशील शल्य चिकित्सा इकाई के सहयोग से जनवरी 2014 में गांव जोगणिया माता में निशुल्क चिकित्सा कैंप लगाया था। कैंप में मरीज नारायण के पथरी के ऑपरेशन हुआ और गलती से उसकी किडनी की एक नस कट गई थी। इससे मरीज का लगातार खून बहने लगा और इलाज के दौरान 24 बोतल खून भी चढ़ाना पढ़ा था और इलाज के लिए उसे जयपुर व अहमदाबाद भी जाना पड़ा।
जिला उपभोक्ता मंच ने इसे इलाज में लापरवाही मानते हुए ट्रस्ट सहित अन्य पर हर्जाना लगाया था। इसे अपील में चुनौती देते हुए ट्रस्ट ने कहा कि उनके जरिए संचालित अस्पताल में निशुल्क इलाज व सरकार की भ्रमणशील शल्य चिकित्सा इकाई के द्वारा किए जाने वाले ऑपरेशन व मरीजों को भर्ती करने की जगह सहित अन्य खाने-पीने का इंतजाम किया जाता है। इसके लिए उन्होंने कोई शुल्क नहीं लिया है। अन्य पक्षकारों ने भी कहा कि ऑपरेशन सही किया था और इसमें कोई लापरवाही नहीं रही। लेकिन आयोग ने कहा कि अपील को खारिज करते हुए कहा कि मरीज के ऑपरेशन के लिए पुरानी पद्दति काम में ली गई जो खतरनाक थी और अब प्रचलन में नहीं है। ऐसे में ट्रस्ट व सरकारी हॉस्पिटल्स इलाज में लापरवाही होने पर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।