24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राबर्ट वाड्रा से जुडे बीकानेर जमीन मामले में दो को मिली जमानत

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan Highcourt ) ने बीकानेर फर्जी जमीन अलॉटमेंट (Bikaner Land Scam ) मामले में दो आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि राबर्ट वाड्रा (Robert Vadra ) पर भी इसी जमीन में से जमीन खरीदने और उसे आगे बेचने पर मनी लॉडिं्रग (Money Laundring) के आरोप हैं।

3 min read
Google source verification
राबर्ट वाड्रा से जुडे बीकानेर जमीन मामले में दो को मिली जमानत

राबर्ट वाड्रा से जुडे बीकानेर जमीन मामले में दो को मिली जमानत

जयपुर

जस्टिस पंकज भंडारी ने यह आदेश फकीर मोहम्मद और रणजीत सिंह की जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए दिए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में पहले कई आरोपियों की जमानत हो चुकी है। पूरे मामले में उनकी छोटी से भूमिका है और उन्हें छह महीने से ज्यादा समय जेल में हो गया है। सरकार ने जमीन भी वापिस ले ली है और मामले के निपटारे में समय लगेगा इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। ईडी ने विरोध में कहा कि पूरे मामले में इन दो आरोपियों की अकेले कोई भूमिका नहीं है बल्कि दूसरे मामलों व आरोपियों से जुड़ी हुई है। पूर्व में जिन आरोपियों की जमानत हो चुकी है उनकी जमानत निरस्तगी के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है और इन पर नोटिस भी हो चुके हैं। इसलिए दोनों आरोपियों को जमानत नहीं दी जाए। नायब तहसीलदार पर फकीर मोहम्मद ने जमीन अलॉट करने और रणजीत सिंह पर पॉवर ऑफ अटार्नी के आधार पर फर्जी लोगों के नाम पट्टे बनवाने के आरोप हैं।

वाड्रा के खिलाफ १२ सितंबर को होगी सुनवाई:

इस मामले से जुडे राबर्ट वाड्रा व उनकी मां मौरीन वाड्रा की याचिकाओं पर हाईकोर्ट जोधपुर में १२ सितंबर को सुनवाई होनी है। वाड्रा व उनकी मां के खिलाफ ईडी ने मनी लॉनड्रिंग के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। हाईकोर्ट से उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है। ईडी ने नवंबर २०१८ में राबर्ट और उनकी मां को सम्मन जारी किए थे। लेकिन,दोनों ईडी के सामने पेश नहीं हुए और हाईकोर्ट में चुनौती देकर सख्त कार्रवाई नहीं करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार की थी। कोर्ट ने दोनों को ईडी के सामने पेश होने के निर्देश देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इस साल फरवरी में राबर्ट और उनकी मां जयपुर में ईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए थे।

है क्या मामला:

सरकार ने महाजन फायरिंग रेंज के लिए बीकानेर के ३४ गांवों की जमीन अवाप्त की थी। विस्थापितों को मुआवजे में बीकानेर में ही मिनिमम प्राईज पर जमीन अलॉट करने का फैसला हुआ। इसके लिए जमीन के बदले चाहने वालों को एप्लीकेशन में खसरा नंबर भरकर देने थे। चालान के जरिए पैसा जमा करवाने पर सरकार को उन्हें जमीन अलॉट करनी थी। तय प्रक्रिया के अनुसार अलॉटमेंट लैटर चार कॉपी में जारी होने थे। इनमें से एक कॉपी अलॉटमेंट लेने वाले को,एक कॉपी संबंधित तहसीलदार को,एक कॉपी एकाउंटस सैक्शन में और एक कॉपी रिकार्ड के लिए बनती हैं।

इसके बाद बाद जिसे जमीन अलॉट हुई है वह संबंधित तहसीलदार को अलॉटमेंट लैटर के साथ एप्लीकेशन व दूसरे दस्तावेज की ऑरिजनल कॉपी देता है। तहसीलदार इनकी जांच के बाद अलॉटमेंट लैटर में बताई गई जमीन अलॉटी के नाम ट्रांसफर करके रेवेन्यू रिकार्ड में जमीन उसके नाम दर्ज करता है।

ईडी का आरोप-

ईडी का कहना है कि सरकारी जमीन हड़पने के लिए सरकारी कारिंदों ने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक गैंग बनाई। इनमें पटवारी,गिरदावर और नायब तहसीलदार शामिल थे। भू-माफियाओं ने जमीन हड़पने के लिए कोलायत व गजनेर तहसील में खाली पड़ी सरकारी जमीन को चिन्हित किया और इनके खसरा नंबर प्राप्त कर लिए। इसके बाद पटवारियों,गिरदावर और नायब तहसीलदारों के साथ मिलकर भू-माफियाओं ने एेसे लोगों के नाम अलॉटमेंट लैटर तैयार किए जो ना तो उन गांव के निवासी थे जिनकी जमीन महाजन फायरिंग रेंज के लिए अवाप्त हुई थी ना ही इनके नाम विस्थापित होने वालों की लिस्ट में थे। कुछ अलॉटमेंट तो एेसे लोगों के नाम बनाए गए जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था। कुल मिलाकर आरोपियों ने करीब १४२२ बीघ जमीन के फर्जी अलॉटमेंट लैटर के जरिए हड़पी थी। १४२२ बीघा में से आरोपियों ने १३७२ बीघा जमीन आगे बेच दी थीं।

ईडी के अनुसार जयप्रकाश,रणजीत सिंह,किशोर सिंह और गुगन ने पटवारियों गिरदावर व नायब तहसीलदार के साथ मिलकर यह फर्जी अलॉटमेंट संबंधी दस्तावेज बनाए और रेवेन्यू रिकार्ड में भी नाम दर्ज करवा दिए। बाद में इन्हीं अलॉटमेंट की जमीनें आगे वाड्रा की स्काई लाईट हॉस्पिलिटी सहित सात कंपनियों को बेची गईं थीं।

राबर्ट वाड्रा की दलीलें-

वाड्रा के वकीलों ने कोर्ट को बताया था कि उनकी कंपनी ना तो जमीन की पहली बार बेचने वाली है और ना ही पहली बार खरीदने वाली। १८ एफआईआर में से किसी में भी उनका नाम नहीं है क्यों कि वह एक सद्भावी खरीददार थे। उनका कहना है कि कंपनी की खरीदी गई ३१.६१ हैक्टेयर जमीन में से बीकानेर के जगतसिंहपुर के नाथाराम को फरवरी २००७ में १२.६५ और हरीराम को १८.९६ हैक्टेयर जमीन अलॉट हुई थीं। १९ नवंबर,२००७ को नाथाराम ने अपनी जमीन राजेन्द्र कुमार को बेच दी थी। इस जमीन का नामांतरकरण भी राजेन्द्र कुमार के नाम हुआ था। हरीराम ने भी अपनी जमीन गजनेर की अपनी जमीन एक किशोर सिंह शेखावत को बेच दी थी।

वाड्रा की कंपनी ने खरीदी जमीन-

वाड्रा की कंपनी स्काईलाईट हॉस्पिलिटी ने अपने पॉवर ऑफ अटार्नी होल्डर महेश नागर के जरिए गजनेर में ३१.६१ हैक्टेयर जमीन राजेन्द्र कुमार व किशोर सिंह शेखावत के पॉवर ऑफ अटार्नी होल्डर अशोक कुमार से खरीदी थी। इसी प्रकार कंपनी ने गोयलारी की ३७.९४ हैक्टेयर जमीन भी सतीश गोयल व अन्य से खरीदी थी।

कंपनी ने बेची जमीन-

स्काईलाईट ने २३ दिंसबर,२०१२ को गजनेर व गोयलारी की जमीन एलीगेनी फिनलीज प्राईवेट लिमिटेड को बेच दी। वाड्रा के अनुसार उनकी कंपनी गोयलारी की जमीन खरीदने वाली चौथी और गजनेर में तीसरी और सद्भावी खरीददार थी। कंपनी ने जमीन उस समय के टाईटल के अनुसार ही खरीदी और उसे आगे बेच दिया था।