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शानदार: अंग्रेजी को जबरदस्त टक्कर देते हुए इन दो राजस्थानियों ने आठ साल में बना दिए 250 हिंदी एप, दोनो सरकारी कार्मिक, काम के बाद के समय का यूज किया

Hindi Diwas: जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, तो हमने पाया कि ग्रामीण छात्रों को हिंदी में अध्ययन सामग्री नहीं मिल पा रही थी।

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Hindi Diwas : आपके मोबाइल में भी कोई न कोई एप्लीकेशन जरूरी होगी, कुछ नहीं तो वाट्सएप तो जरूर होगा ही...। जो भी एप्लीकेशन होगी इसके सौ फीसदी चांस हैं कि वह अंग्रेजी में ही होगी। ऐसे में उन लोगों को परेशानी का सामना करना पडता है जो हिंदी पाठी हैं, खास तौर पर ग्रामीण परिवेश के बच्चे जो सरकारी स्कूलों में भी नहीं जा पाते। लेकिन राजस्थान के दो जूनूनी लोगों ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि इससे जरूरतमंद लोगों और छात्रों की राह आसान हो रही है। वे भी आगे बढ़ रहे हैं और जीवन को सरल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल दो सरकारी कार्मिकों ने दो सौ पचास से भी ज्यादा हिंदी एप्लीकेशन बना ड़ाली है, जो अब लोगों की राह आसान कर रही है। दोनो को एप गुरू के रूप में जाना जाता है। इसके लिए इन दोनो को कई सम्मान भी मिल चुके हैं।

दरअसल सीकर जिले के रहने वलो सुरेंद्र तेतरवाल और सुरेश ओला दोनों के पास कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री है। तेतरवाल जहां सेल्स टैक्स ऑफिसर हैं, वहीं ओला शिक्षा विभाग में हेडमास्टर हैं। छात्रों को आसानी से शिक्षा प्राप्त करने में मदद करने के लिए तेतरवाल और ओला के प्रयासों ने उन्हें पहचान दिलाई है और केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने उन्हें पुरस्कार प्रदान किए हैं। ओला ने कहा, हमने इन मोबाइल एप्लिकेशन को सरकारी सेवा घंटों के बाद अपने खाली समय में विकसित किया। जब हम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, तो हमने पाया कि ग्रामीण छात्रों को हिंदी में अध्ययन सामग्री नहीं मिल पा रही थी।

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हमने सबसे पहले ब्लॉग, छात्रों के लिए पठनीय सामग्री अपलोड की और बाद में 2015 में विषय, विशिष्ट मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करना शुरू किया। ओला ने कहा कि एप्लिकेशन में प्राइमरी, मिडिल और सीनियर सेकेंडरी क्लासेज के साथ.साथ स्नातक और स्नातकोत्तर करने वाले छात्रों के लिए अध्ययन सामग्री मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमने अध्ययन सामग्री को और विकसित करने और छात्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को लगभग 100 मोबाइल एप्लिकेशन भेंट किए हैं।

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