
Umrao Salodia
जयपुर। जयपुर में करोड़ों रुपए की जमीन धोखाधड़ी से जुड़े मामलें में सोमवार को जेल गए पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव उमराव सालोदिया अपने कार्यकाल के दौरान के भी कई बार विवादों में घिर चुके हैं। अपने से जूनियर अफसर को मुख्य सचिव बनाए जाने से आहत पूर्व एसीएस सालोदिया ने तत्कालीन वसुंधरा सरकार पर दलित अधिकारियों के साथ भेदभाव करने और उनको प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाकर नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया है।
यहीं नहीं, सालोदिया ने अपने रिटायरमेंट से महज 6 माह पहले सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म अपनाने की घोषणा कर दी थी। सालोदिया ने 31 दिसंबर 2015 को बाकायदा मीडिया के समक्ष धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म अपनाए जाने की बात कहते कहा था कि इस्लाम की शिक्षाएं अच्छी हैं वहां कोई भेदभाव नहीं होता।
सालोदिया ने भी कहा था कि अब उनका नाम उमराव सालोदिया नहीं बल्कि उमराव खान है। सालेादिया की सेवानिवृति 30 जून 2016 में थी लेकिन उन्होंने 31 दिसंबर 2015 को ही एच्छिक सेवानिवृत्ति की घोषणा कर दी।
उमराव सालोदिया 1978 बैच के आईएएस अधिकारी थे। और उस समय वे एसीएस हैं और रोडवेज चेयरमैन भी थे। राजस्थाने के अफसर शाही के इतिहास में ये पहला मौका था, जब एक वरिष्ठ आइएएस अफसर ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए धर्म परिवर्तन की घोषणा की थी। वीआरएस लेने के बाद सालोदिया के कांग्रेस पार्टी से जुड़ने और निवाई से चुनाव लड़ने की अटकलें भी चलती रहीं, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद सालोदिया ने राजनीति में कदम में रखते हुए 2019 में हुए लोकसभा में बसपा के टिकट पर जयपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं।
बता दें कि 2013 में तत्कालीन रेवेन्यू बोर्ड अध्यक्ष रहते उमराव सालोदिया, तत्कालीन रेवेन्यू बोर्ड सदस्य हरिशंकर भारद्वाज, तत्कालीन तहसीलदार आमेर अरविंद कुमार शर्मा, तत्कालीन गिरदावर आमेर मक्खन लाल सहित 6 लोगों पर करोड़ों रुपए की जमीन धोखाधड़ी मामले में एसीबी ने चालान पेश किया था, जिस पर 26 अगस्त 2016 को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सालोदिया को जेल भेज दिया था।
Published on:
27 Aug 2019 04:41 pm

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