
राजस्थान में बेरोजगारी भत्ता लेने नहीं आ रहे बेरोजगार, सरकार कर रही इंतजार, जानें क्या है कारण
संजय कौशिक / जयपुर। राज्य में बेरोजगारी भत्ते के ताजा हालात ये हैं कि पिछले साल तक जहां भत्ता लेने वालों की कतार लाखों में थी वहीं, नई योजना में बेरोजगार भत्ता लेने नहीं आ रहे हैं। हालांकि कांग्रेस सरकार ने राज्य के बेरोजगारों को लुभाने के लिए भले ही बेरोजगारी भत्ते की राशि में एक हजार रुपए की बढ़ोतरी कर दी है, लेकिन भत्ते के साथ लगाई शर्तें राज्य के बेरोजगारों को रास नहीं आ रही है।
जनवरी से नए प्रावधान
सरकार बेरोजगारों का इंतजार कर रही है। एक जनवरी से सरकार में योजना में नए प्रावधान जोड़े हैं, जिसे बेरोजगारों ने सिरे से खारिज कर दिया है। पिछले साल तक जहां एक लाख 60 हजार बेरोजगारों को भत्ता दिया जाता था। नइ योजना में लिमिट बढ़ाकर दो लाख कर दी गई है। लेकिन नई योजना में 10 हजार बेरोजगार ही जुड़ पाए हैं। यानी अभी एक लाख 90 हजार बेरोजगारों को और शामिल करना है। इधर, साल 2021 में बेरोजगारी भत्ते का बजट 1012 करोड़ रुपए था। इसमें से करीब 600 करोड़ रुपए का भत्ता दे दिया गया है। अब नए साल से नई योजना लागू की गई है। अभी 400 करोड़ का बजट शेष हैं, लेकिन भत्ता लेने के लिए बेरोजगार नहीं आ रहे हैं।
ये है योजना
कांग्रेस सरकार ने आने के बाद एक फरवरी, 2019 को मुख्यमंत्री युवा संबल योजना की शुरुआत की। इसके तहत पुरुषों को जहां तीन हजार रुपए वहीं एससी, एसटी, महिला, दिव्यांग और थर्ड जेंडर को 3500 रुपए बेरोजगारी भत्ते के रूप में दिए जा रहे हैं। स्नातक होने के बाद इसमें आवेदन किए जाते हैं। आवेदक की उम्र 30 साल होनी चाहिए। आवेदक राजस्थान मूल का निवासी हो और परिवार की आय दो लाख तक होनी चाहिए।
बेरोजगारों की बेरुखी की वजह
अब भत्ते के साथ इंटर्न और प्रशिक्षण भी जरूरी किया गया है। इसके तहत बेरोजगारों को सरकारी कार्यालयों में चार घंटे की इंटर्नशिप करनी है। वहीं, जिन बेरोजगारों के पास प्रोफेशनल डिग्री नहीं हैं, उन्हें तीन माह की प्रशिक्षण करना है। ऐसे में बेरोजगारों इसे समय की बर्बादी बताते हुए योजना में शामिल नहीं हो रहे हैं। भत्ता लेने वाले अधिकतर बेरोजगार ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। बेरोजगारों का कहना है कि इंटर्नशिप और प्रशिक्षण में पढ़ाई प्रभावित होगी।
बैकफुट पर सरकार
नई योजना के तहत पहले सरकार ने इंटर्नशिप करने वाले बेरोजगारों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया था। पत्रिका ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद सरकार बैकफुट पर आ गई। सरकार ने हाल ही ड्रेस कोड की बाध्यता हटा दी है। लेकिन इंटर्नशिप और प्रशिक्षण जारी रहेगा।
सरकारों के साथ बदलती रही योजना
- 1 जुलाई 2007 में इस योजना की शुरुआत हुई, इसका नाम अक्षत योजना दिया गया, उस समय 400-600 रुपए भत्ता दिया जाता था।
- 1 अक्टूबर 09 में इसका नाम बदलकर अक्षत कौशल योजना कर दिया, तब भत्ते के साथ प्रशिक्षण और वाउचर दिया जाने लगा।
- 1 जुलाई 2012 में इसका नाम बदलकर राजस्थान बेरोजगारी भत्ता कर दिया गया, भत्ता बढ़कर 500-600 रुपए हुआ।
- 1 फरवरी 2019 को फिर इसका नाम बदलकर मुख्यमंत्री युवा संबल योजना कर दिया और भत्ता बढ़ाकर 3000-3500 रुपए कर दिया।
- 1 जनवरी 2022 से भत्ता एक हजार रुपए बढ़ा दिया गया, अब 4000-4500 रुपए दिए जाने हैं।
Published on:
10 Feb 2022, 5:54 PM IST
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