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राजस्थान को विशेष दर्जा, ईआरसीपी को मंजूरी

-केन्द्र सरकार की बजट से पहले रखी गई बैठक में राजस्थान सरकार ने रखी अपनी मांग
-केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्र का हिस्सा 80 से 90 फीसदी करने की मांग

केन्द्रीय बजट की तैयारी शुरू

जयपुर

Published: December 31, 2021 01:42:54 am

नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान सरकार ने एक बार फिर केन्द्र सरकार से राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने, ईस्टर्न केनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को मंजूरी देने और केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्र का हिस्सा 80 से 90 फीसदी तक करने की मांग की है।
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राजस्थान सरकार की ओर से तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने यह मांग केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष केन्द्रीय बजट की तैयारी को लेकर बजट पूर्व राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में रखी। गर्ग ने बताया कि राजस्थान राज्य की कॉस्ट ऑफ सर्विस डिलीवरी अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा है। इसके चलते केन्द्र सरकार को राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। गर्ग ने पत्रकारों से कहा कि जल जीवन मिशन को सफल बनाने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार का वित्त पोषण अनुपात 90:10 का किया जाना चाहिए। साथ ही इस योजना में केन्द्रांश के पुनर्भरण की अवधि को 2 वर्ष के लिए बढ़ाकर मार्च, 2026 की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना के अन्तर्गत प्रति परिवार प्रतिवर्ष 1 हजार 52 रुपए की सीलिंग है। इससे हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्य सरकार की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडल नीति की बदौलत राजस्थान देश के सबसे बड़े इंवेस्टमेंट हब के रूप में उभर रहा है। गर्ग ने कहा कि राजस्थान के बांसवाड़ा-रतलाम व सवाई माधोपुर-टोंक-नसीराबाद रेल लाइन को मंजूरी देनी चाहिए।

-जब पानी नहीं होगा तो नल लगाने से क्या होगा
गर्ग ने कहा कि राजस्थान के लिए ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को इस बजट में ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पानी के जल जीवन मिशन के तहत नल लगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। इसलिए नदियों के जोडऩे के लिए केन्द्र सरकार को तेजी से प्रयास करने चाङ्क्षहए।
-राजस्व घाटा अनुदान को बढ़ाया जाए

गर्ग ने कहा कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण राज्य अर्थव्यवस्था के प्रभावित हुई है। इससे में राजस्व घाटा अनुदान को वर्ष 2022-23 के लिए 4862 करोड़ रुपए से बढाकर 9878 करोड़ रुपए किया जाना चाहिए। इस अनुदान को 2023-24 से 2025-26 की अवधि मेे जारी रखा जाना चाहिए। सामान्य उधार सीमा को वर्ष 2021-22 के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पादन का 5 प्रतिशत व वर्ष 2022-23 से वर्ष 2024-25 के लिए 4.5 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
-सोने-चांदी पर आयात शुल्क 4 फीसदी करें
गर्ग ने कहा कि वर्तमान में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 7.5 प्रतिशत और प्लेटिनम पर 10 प्रतिशत है। इसे घटाकर 4 प्रतिशत किया जाना चाहिए, ताकि भारतीय उत्पाद दुबई, सिंगापुर आदि से प्रतिस्पर्धा कर सकें। जबकि विदेशी आयात के कारण भारी घाटे में चल रहे स्थानीय खनन उद्योग को बचाने के लिए विट्रिफाईड टाइल्स के आयात पर वर्तमान बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत को बढ़ाकर 25 प्रतिशत की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य और शिक्षा बजट बढ़ाया जाए
गर्ग ने केन्द्र सरकार से स्वास्थ्य के लिए जीडीपी का 3 प्रतिशत और शिक्षा के लिए 4 प्रतिशत बजट देने की आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बजट में अधिक आवंटन की जरुरत है। वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने की दृष्टि से स्वास्थ्य के लिए जीडीपी का 3 प्रतिशत और शिक्षा के लिए जीडीपी का 4 प्रतिशत बजट आवंटित किया जाना चाहिए।
महंगाई पर भी चर्चा
गर्ग ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि रसोई की कीमतों में कमी करके आम आदमी को राहत दी जाए और पेट्रोल पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी व सेस में कमी करके भी महंगाई को कम किया जा सकता है।

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