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अदालत में एक शेर का अर्थ भी नहीं बता पाए उर्दू व्याख्याता

राजस्थान हाईकोर्ट में गुरुवार को एक उर्दू व्याख्याता अपने तबादले की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा उर्दू के एक शेर का अर्थ पूछने पर जवाब ही नहीं दे पाए।

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avanish kr upadhyay

Oct 30, 2015

राजस्थान हाईकोर्ट में गुरुवार को एक उर्दू व्याख्याता अपने तबादले की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा उर्दू के एक शेर का अर्थ पूछने पर जवाब ही नहीं दे पाए। इस पर वरिष्ठ न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास ने तल्ख अंदाज में कहा कि आप छात्रों को क्या उर्दू पढ़ाते हो ?

इसके साथ ही उन्होंने माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर द्वारा उनका जोधपुर से सोजत तबादला किए जाने के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश व्यास ने याचिकाकर्ता से पूछा कि छात्रों को क्या सिखाते हो।

याचिकाकर्ता अब्दुल शकूर ने जवाब दिया कि उर्दू पढ़ाते हैं। जिस पर न्यायालय ने उन्हें शेर सुनाकर अर्थ पूछा कि दीदार की हविश है तो नजरें जमा के रख, चिलमन हो या नकाब सरकता जरूर है। याचिकाकर्ता कोई जवाब नहीं दे पाया। फिर गलत जवाब देने लगा तो कहा कि जब इसका अर्थ भी नहीं बता पाए तो पढ़ाते क्या होंगे। आपको नियुक्ति कैसे मिली ?

याचिकाकर्ता का कहना था कि निदेशक ने उन्हें 3 सितम्बर को जोधपुर से सोजत स्थानांतरित किया है और दूसरी ओर जोधपुर की दो स्कूलों में उर्दू व्याख्याता के पद खाली पड़े हैं। जिसके लिए संविदा पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन दिया गया है। वरिष्ठ न्यायाधीश व्यास ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि स्थानांतरण सेवा का हिस्सा है और नौकरी के लिए जाना पड़ेगा।