
जिला परिवहन अधिकारी अब दूसरे राज्यों के वाहनों का भी अपने राज्य में पंजीयन निलंबित कर सकते हैं, लेकिन उन्हें एक माह के भीतर संबंधित राज्य के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी को इसकी सूचना भिजवानी होगी। जयपुर में वाहन का पंजीयन निलंबित करने के मामले में एमपी हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था दी, साथ ही मोटर व्हीकल नियमों को स्पष्ट किया।
आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जयपुर परिवहन कार्यालय द्वितीय के उड़नदस्ते ने एक मई 2024 को खाटूश्याम से ग्वालियर जाते हुए स्लीपर यात्री वाहन यूपी 95 टी 5127 को बस बॉडी कोड को मानकों का उल्लंघन करने पर जब्त किया। जांच के दौरान सामने आया कि वाहन में चैसिस के ऊपर और पूरे फर्श के नीचे लगभग 26 फीट लम्बी, 8 फीट चौड़ी व 2 फीट ऊंचाई की डिग्गी/डिक्की बनी थी।
इसके अतिरिक्त वाहन का चैसिस काटकर और ओवरहेंग कर पीछे की ओर लगभग 4 फीट लम्बी व 8 फीट चौड़ी अतिरिक्त डिग्गी/डिक्की बनाई हुई थी। यात्री वाहन में लगे सभी स्लीपरों की निर्धारित लम्बाई 1800 एमएम से कम गई। इसी के साथ आपातकालीन द्वार भी नहीं थे। इस पर आरटीओ-2 की ओर से बस का पंजीयन निलंबित कर दिया।
वाहन मालिक ने एमपी हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा कि वाहन ग्वालियर में पंजीकृत होने के कारण जिला परिवहन अधिकारी जयपुर द्वितीय पंजीयन निलंबित नहीं कर सकता। इस पर कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए कहा कि ग्वालियर में पंजीकृत वाहन का जिला परिवहन अधिकारी जयपुर द्वितीय की ओर से पंजीयन निलंबित किया जा सकता है।
पंजीयन निलंबन की सूचना वाहन के मूल पंजीयन अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारी ग्वालियर को देनी होगी। इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट किया कि किसी राज्य में पंजीकृत टूरिस्ट यात्री वाहनों का अन्य राज्यों में संचालन होने पर संबंधित राज्य के मोटर यान नियमों की पालना करनी होगी।
Published on:
02 Sept 2024 09:12 am

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