
नंदेश्वर महादेव मंदिर में संत संजयगिरी का संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला
पाली. दुकानें खाली करवाने के लिए कुछ दिनों पूर्व अनशन करने करने वाले संत संजयगिरी की मौत पर मंगलवार को नई सब्जी मंडी इलाके में बवाल हो गया।
संत की हत्या करने का आरोप लगाते हुए लोगों ने मंदिर के बाहर स्थित कई दुकानों के ताले व गेट तोड़े और दो दुकानों में आग लगा दी। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद लोगों ने किराए पर चल रही दुकानें खाली नहीं किए जाने तक देह को समाधि देने से इनकार कर दिया।
इधर, महंत तारकेश्वर गिरी की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। घटना को लेकर मंदिर परिसर में संतों व श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। इधर बड़ी संख्या में पुलिस एवं आरएएसी का जाप्ता भी मौके पर तैनात रहा। इस दौरान संत अभयगिरी, परशुराम गिरी, सुरजनदास, किशन प्रजापत, शंकरानंद सहित कई संत व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दिन भर चलता रहा समझाइश का दौर
मौके पर पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयपालसिंह यादव, एसडीएम विशाल दवे ने दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया तथा पार्थिव देह को समाधि देने की बात कही। महंत व श्रद्धालु दुकानें खाली होने के बाद ही संत को समाधि देने की बात को लेकर अड़े रहे। समझाइश का कोई हल नहीं निकला तो दोपहर 3.22 पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यादव, एसडीएम दवे मौके से रवाना हो गए।
विधायक राठौड़ के यहां भी चली बैठक
मंदिर पक्ष के लोग तथा पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की बैठक विधायक मदन राठौड़ के निवास पर हुई। करीब डेढ़ घंटे चली बैठक के बाद भी संत दुकानें खाली होने के बाद ही समाधि देने की बात को लेकर अड़े रहे। आखिरकार बुधवार को मामले को लेकर कार्रवाई का पुलिस ने आश्वासन दिया।
संत ने बताया था जान को खतरा
छह अगस्त को संत संजय गिरी ने कोतवाली थाने में शिकायत की थी। जिसमें उन्होंने कुछ लोगों से अपनी जान को खतरा बताया था। शिकायत में उन्होंने लिखा कि अगस्त 2015 को दोपहर तीन बजे कोर्ट से पेशी करवाकर मंदिर आते समय किराएदार हनवंतसिंह, लादूराम, केशरसिंह, संतोषसिंह, सुरेन्द्रसिंह, नारायणसिंह ने मंदिर आकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। मंदिर पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई नहीं की और आरोपितों ने संत संजयगिरी की हत्या कर दी।
मामले में यह हुआ था निर्णय
मंदिर परिसर की 26 दुकाने हैं। जिनको खाली करवाने को लेकर विवाद चल रहा है। इसको लेकर संत संजयगिरी ने तीन से आठ अप्रेल तक अनशन किया गया। जिस पर आठ अप्रेल को संत अभयगिरी, कोतवाल देरावरसिंह व पार्षद राकेश भाटी की उपस्थिति में दोनों पक्षों की बैठक हुई। जिसमें समझौता हुआ था कि यहां भव्य मंदिर बनेगा तथा व्यवस्थित रूप से दुकानें बनाकर दी जाएगी। जिस पर दोनों पक्ष रजामंद हो गए। उसके बाद संत संजय गिरी को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया था। परन्तु सात माह बाद भी दुकानें खाली नहीं हुई। कई दुकानदारों ने प्रकरण दर्ज करवा दिया और कइयों ने किराया देना ही बंद कर दिया। दुकानें खाली करवाने के लिए अनशन करने वाले संत संजयगिरी का नौ अक्टूबर 2015 मंदिर में संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिला। मौके पर जहर की एक खाली शीशी भी मिली।
आसाराम से पूछो, कोर्ट-कचहरी व जेल क्या होती है
समझाइश के बाद भी संत व श्रद्धालु समाधि नहीं देने की बात को अड़े रहे तथा प्रदर्शन करते रहे तो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयपालसिंह यादव के मुंह से निकल गया कि संत आसाराम से पूछो कि कोर्ट-कचहरी और जेल क्या होती है। इसलिए कानून के हिसाब से न्याय प्राप्त करने की कोशिश करों। उनके इतना कहते ही कई संत गुस्सा हो गए। उन्होंने कहा कि आसाराम व हमारे में काफी अंतर है। हम जेल जाने को भी तैयार है। लेकिन अपने साथी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
किराया भी नहीं दे रहे समय पर
मंदिर की 26 दुकानें हैं। अधिकतर दुकानदारों ने पिछले 17 माह से किराया तक नहीं दिया है तो कई जने एेसे हैं जिन्होंने पिछले तीन माह से किराया तक नहीं दिया।
आइये देखें लाइव फोटो.. पहले दुकानें खाली होगी, फिर देंगे संत को समाधि
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