
poor education condition in middle school of Pali
विद्यार्थी हमारे देश का भविष्य हैं। उनके आज पर देश का कल टिका है, लेकिन इस भविष्य को आज ही संवारा नहीं जा रहा, तो बेहतर कल की उम्मीद ही बेमानी है। जिस देश के संविधान में 14 साल तक के बच्चों के लिए शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, उसी देश में बच्चों के शैक्षिक जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के पाली जिला मुख्यालय की.... यहां एक बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसा भी है, जहां पढ़ाई करने के लिए पहुंच रही 80 बच्चियों के लिए महज एक ही शिक्षिका नियुक्त है। ऐसे में पहली से चौथी की बालिकाएं एक ही कक्ष में पढ़ने को मजबूर हैं, तो वहीं पांचवीं से सातवीं तक की कक्षओं को पढ़ाने का जिम्मा आठवीं कक्षा की छात्राओं ने उठा रखा है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी विद्यालयों के बच्चे निजी स्कूलों के बच्चों से प्रतिस्पद्धाओं में क्यूं पिछड़ जाते हैं।
हम बात कर रहे हैं राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय पैकेज कॉलोनी की, जो ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पाली कार्यालय और कलेक्टरेट से कुछ ही दूर स्थित है। यहां पहली से चौथी कक्षा के बच्चे एक ही कक्ष में बैठ कर पढ़ाई करते हैं तो पांचवीं से सातवीं तक के बच्चों को आठवीं की बालिकाएं पढ़ाती हैं। इन बच्चों की अंग्रेजी की क्लास भी यही बच्च्यिां लेती हैं।
ऐसा भी नहीं है कि इन हालात के बारे में यहां के ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा अधिकारियों को जानकारी नहीं है। सब कुछ पता होते होते हुए भी यहां 80 बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। नतीजा ये है कि स्कूल में केवल एक शिक्षिका प्रधानाध्यापिका व शिक्षिका दोनों काम कर रही है। शिक्षिका की मानें तो वे इस बारे में अधिकारियों को लिखित में शिकायत दे चुकी हैं। ऐसे में इस स्कूल का शिक्षा का स्तर कैसा होगा यह तो भविष्य ही तय करेगा।
आपको बता दें कि पैकेज कॉलोनी की इस स्कूल में 2 महीने पहले स्टाफिंग पैटर्न के चलते 3 शिक्षकों को हटा दिया गया था। अब इस स्कूल में सब बच्चों के ऊपर सिर्फ एक ही शिक्षिका है। ऐसे में एक कक्षा 4 तक तो एक ही क्लास में पढ़ती है और कक्षा 5 6 7 को आठवीं की छात्रा अध्यन करवाती है ।
Updated on:
23 Feb 2018 11:45 am
Published on:
23 Feb 2018 11:22 am

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