
देवेन्द्र सिंह / जयपुर. 68 साल पहले पड़दादा नवी बक्स आतिशबाज ने पहली बार 20 फीट का रावण का पुतला बनाया था। जिसे देखने के लिए दूर-दूर लोग आए थे। उस समय रावण बनाने के एवज में उन्हें 250 रुपए बतौर मेहनताना मिले थे। उसके बाद जैसे-जैसे समय गुजरता गया साल दर साल महंगाई के साथ रावण के पुतले का कद भी बढ़ता गया। अब उनकी पांचवीं पीढ़ी के सदस्य जयपुर का सबसे बड़ा 105 फीट का रावण का पुतला बना रहे हैं। यह कहना है श्रीराम मंदिर प्रन्यास श्री सनातन धर्म सभा, आदर्शनगर के तत्वावधान में विजयदशमी पर होने वाले रावण दहन के लिए पुतला बना रहे परिवार के सदस्य राजा भैया का। मथुरा निवासी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजा भैया बताते है महंगाई तो सुरसा के मुख की तरह वर्ष दर वर्ष बढती जा रही है, लेकिन उस हिसाब से मेहनताना नहीं बढ़ रहा। लेकिन समिति के सदस्यों का स्नेह उन्हें यहां हर बार खींच लाता है। आदर्शनगर के दशहरा मैदान में उनके बनाए रावण के दहन को देखने के लिए हर साल हजारों लोगों की भीड़ जुटती है।
खास बात यह है कि जयपुर में पिछले 68 साल से मथुरा का यह मुस्लिम परिवार धार्मिक सौहार्द की उम्दा मिसाल को पेश करते हुए रावण और कुंभकरण के पुतलों का निर्माण कर रहा है। परिवार के सदस्य राजा भैया ने बताया कि परिवार के 20 सदस्य जन्माष्टमी के बाद से ही इन पुतलों का निर्माण कर रहे हैं। इस बार 105 फीट का रावण 90 फीट ऊंचे कुंभकरण का पुतला बनाया है। मुकुट व पुतले का ढांचा तैयार हो चुका है और अब इस पर रंग-रोगन, आतिशबाजी व लाइटिंग लगाने का काम किया जा रहा है।
चांद मोहम्मद ने बताया कि 68 वर्ष पहले उनके पड़दादा नवी बक्स आतिशबाज यहां पुतले बनाने आए थे। उनके बाद दादा सुभान बक्स, फिर पिता लखोभाई और अब उनका परिवार हर साल पुतले बनाने की परंपरा का निर्वहन कर रहा है। इस काम में उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे भी पीछे नहीं है। साथ ही इन पर संप्रदाय का बंधन भी कभी आड़े नहीं आया। हर साल दो महीने तक दिन-रात मेहनत करके यह परिवार रावण और कुंभकरण के पुतले का निर्माण करता है।
गुल मोहम्मद ने बताया कि समय के साथ साथ पुतलों की ऊंचाई बढ़ती जा रही है। उनके पड़दादा ने 20 फीट का रावण बनाया था। धीरे-धीरे समय के साथ रावण व कुंभकरण का कद बढ़ता गया। इस बार 105 फीट का रावण व 90 फीट का कुंभकरण का पुतला बनाया है। पुतलों के निर्माण में 1000 बांस, 200 किलो मूंज बाण, 200 किलो सण, 20 किलो धागा, 500 किलो मैदा, 1000 मीटर कपड़ा, 200 किलो रद्दी कागज, 400 किलो खाकी कागज, 30 किलों अलग-अलग रंग, और करीब 4 हजार सजावटी रंगीन पन्नियाें का उपयोग हुआ है।
सात दशक के सफर में पुतलों के साथ मुकुट का आकार भी बढ़ा है। इस बार विशेष राजशाही मुकुट बनाया गया है, जो 25 फीट ऊंचा है। मुकुट में कारीगरी कर चमकीली रंगीन फरियां लगाई गई है जो हीरे-मोती एवं रत्नों की तरह दिखाई देंगी।
Updated on:
11 Oct 2024 03:20 pm
Published on:
11 Oct 2024 11:39 am
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