
जयपुर।
राजस्थान में 'अकबर' ( Akbar ) के बाद अब 'सावरकर' ( Vinayak Damodar Savarkar ) को लेकर Ashok Gehlot सरकार और BJP के बीच विवाद गहरा गया है। स्कूली पाठ्यक्रम में सावरकर के पाठ में बदलाव के बाद दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ आमने-सामने हो गए हैं। नेताओं के बीच बयानबाज़ियों का सिलसिला परवान चढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां इस बदलाव को सही बता रही है। वहीं भाजपा, इस बदलाव को हिंदुत्व से जुड़े क्रांतिकारियों का अपमान बता रही है।
इस विवाद और गतिरोध के बीच जानिये सावरकर की ज़िन्दगी के बारे में कुछ रोचक जानकारियां।
1- सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। उनका जन्म 28 मई 1883 को और मृत्यु 23 फ़रवरी 1933 को हुई। उन्हें स्वातंत्र्यवीर, वीर सावरकर के नाम से भी जाना गया।
2- हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा (हिन्दुत्व) को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय सावरकर को जाता है। वे न केवल स्वाधीनता-संग्राम के सेनानी थे बल्कि क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, वकील, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे। उन्होंने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था।
3- सावरकर की मां का नाम राधाबाई और पिताजी का नाम दामोदर पन्त सावरकर था। इनके दो भाई गणेश (बाबाराव) और नारायण दामोदर सावरकर तथा एक बहन नैनाबाई थीं। जब वे केवल नौ वर्ष के थे तभी हैजे की महामारी में उनकी माताजी का देहान्त हो गया। इसके सात वर्ष बाद 1899 में प्लेग की महामारी में उनके पिता जी भी स्वर्ग सिधार गए। उनके बड़े भाई गणेश ने परिवार के पालन-पोषण का कार्य सँभाला।
4- शिवाजी हाईस्कूल नासिक से 1901 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। बचपन से ही वे पढ़ाकू तो थे ही बल्कि उन दिनों उन्होंने कुछ कविताएँ भी लिखी। इस अवधि में विनायक ने स्थानीय नवयुवकों को संगठित करके मित्र मेलों का आयोजन किया।
5- 1901 में रामचन्द्र त्रयम्बक चिपलूणकर की पुत्री यमुनाबाई के साथ उनका विवाह हुआ। उनके ससुरजी ने उनकी विश्वविद्यालय की शिक्षा का भार उठाया। 1902 में मैट्रिक की पढाई पूरी करके उन्होंने पुणे के फर्ग्युसन कालेज से बीए किया।
6- 1904 में सावरकर ने अभिनव भारत नाम से एक क्रान्तिकारी संगठन की स्थापना की। 1904 में बंगाल के विभाजन के बाद पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे में भी वे राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ओजस्वी भाषण देते थे। बाल गंगाधर तिलक के अनुमोदन पर 1906 में उन्हें श्यामजी कृष्ण वर्मा छात्रवृत्ति मिली।
7- 1908 में इनकी पुस्तक द इण्डियन वार ऑफ इण्डिपेण्डेंस : 1857 तैयार हो गयी लेकिन इसके मुद्रण की समस्या आई। इसके लिए लन्दन से लेकर पेरिस और जर्मनी तक प्रयास किये लेकिन वे सभी प्रयास असफल रहे। बाद में यह पुस्तक किसी प्रकार गुप्त रूप से हॉलैंड से प्रकाशित हुई और इसकी प्रतियां फ्रांस पहुंचाई गईं। इस पुस्तक में सावरकर ने 1857 के सिपाही विद्रोह को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतन्त्रता की पहली लड़ाई बताया। मई 1909 में इन्होंने लन्दन से बार एट ला (वकालत) की परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन उन्हें वहां वकालत करने की अनुमति नहीं मिली।
8- सावरकर ने Free India Society का निर्माण किया जिससे वो अपने साथी भारतीय छात्रों को स्वतंत्रता के लिए लड़ने को प्रेरित करते थे। सावरकर ने 1857 की क्रांति पर आधारित किताबे पढी और “The History of the War of Indian Independence” नाम की किताब लिखी। उन्होंने 1857 की क्रांति के बारे में गहन अध्ययन किया कि किस तरह अंग्रेजो को जड़ से उखाड़ा जा सकता है।
9- 1909 को मदनलाल ढींगरा द्वारा विलियम हट कर्जन वायली को गोली मार दिए जाने के बाद उन्होंने लन्दन टाइम्स में एक लेख भी लिखा था, जिसके बाद पैरिस से लन्दन पहुँचने पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। लेकिन वे 1910 को एसएस मोरिया नाम के जहाज से भारत ले जाते समय सीवर ***** के रास्ते ये भाग निकले। बाद में उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई। इसके बाद फिर जनवरी 1911 को इन्हें दोबारा आजीवन कारावास दिया गया। इस तरह से सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने दो-दो आजन्म कारावास की सजा दी, जो विश्व के इतिहास की पहली एवं अनोखी सजा थी।
10- सावरकर ने अपने मित्रों को बम बनाना और गुरिल्ला पद्धति से युद्ध करने की कला सिखाई। 1909 में सावरकर के मित्र और अनुयायी मदन लाल ढींगरा ने एक सार्वजनिक बैठक में अंग्रेज अफसर कर्जन की हत्या कर दी। सावरकर ने धींगरा को राजनीतिक और कानूनी सहयोग दिया, लेकिन बाद में अंग्रेज सरकार ने एक गुप्त और प्रतिबंधित परीक्षण कर धींगरा को मौत की सजा सुना दी, जिससे लन्दन में रहने वाले भारतीय छात्र भडक गये। सावरकर ने धींगरा को एक देशभक्त बताकर क्रांतिकारी विद्रोह को ओर उग्र कर दिया था।
11- सावरकर की गतिविधियों को देखते हुए अंग्रेज सरकार ने हत्या की योजना में शामिल होने और पिस्तौले भारत भेजने के जुर्म में फंसा दिया, जिसके बाद सावरकर को गिरफ्तार कर लिया गया। अब सावरकर को आगे के अभियोग के लिए भारत ले जाने का विचार किया गया। जब सावरकर को भारत जाने की खबर पता चली तो सावरकर ने अपने मित्र को जहाज से फ्रांस के रुकते वक्त भाग जाने की योजना पत्र में लिखी। जहाज रुका और सावरकर खिड़की से निकलकर समुद्र के पानी में तैरते हुए भाग गए, लेकिन मित्र को आने में देर होने की वजह से उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।
12- नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें 1911 को काला पानी की सजा पर सेलुलर जेल भेजा गया। सावरकर 4 जुलाई, 1911 से 21 मई, 1921 तक पोर्ट ब्लेयर की जेल में ही रहे।
शिक्षाविदें के पास बदलाव के प्रमाण मौजूद
शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पिछली सरकार ने पाठ्यक्रम में इस प्रकार का बदलाव किया। आजादी के समय में जिनका कोई योगदान कम था, वीर सावरकर जैसे लोगों को महिमामंडि़त कर दिखाया गया। समीक्षा की। बड़े ही ठोस आधारों पर वर्णन किया। जिन शिक्षाविदें ने यह पाठ लिखा है, उसके प्रमाण-साक्ष्य शिक्षाविदें के पास मौजूद हैं। उन्होंने सोच-समझकर ही लिखा है। इसीलिए यह कहना कि हमने सावरकर का अपमान किया, यह सरासर गलत है। आरएएस ने अपनी सोच के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव किया था। शिक्षा में बच्चों को जो पढ़ाया जाए, जो सही हो वही पढ़ाया जाए।
हिंदुत्व विरोधी मानसिकता
पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि कांग्रेस हिंदुत्व विरोधी मानसिकता की पार्टी है। ऐसे राष्ट्रभक्त की उपेक्षा करती है, जो हिंदुत्व से जुड़े रहे हैं। अब पाठ्यक्रम में बदलाव कर वीर सावरकर के बारे में अनर्गल इतिहास पढ़ा रही है। यह कार्य निंदनीय व अशोभनीय है। वीर सावरकर को दो बार आजीवन कारावास मिला वे अंग्रेजों से लड़ते रहे। उनके पाठ को सही प्रकार से बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए।
इतिहास में तोड़-मरोड़ करने से पार्टी नहीं बना सकती अपना इतिहास
स्कूलों में चल रहे वीर सावरकर के पाठ्यक्रम में अंग्रेजों के साथ माफी नामे को शामिल करने के सवाल पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वे तो बचपन से ही सुनते आ रहे हैं। वैसे जब भी कोई सरकार बनती है तो इसके लिए कमेटी गठित होती है। वो अपना काम करती है। लेकिन मेरा मानना है कि जो पार्टी इतिहास को तोड़ेगी-मरोड़ेगी, वो अपना इतिहास कभी नहीं बना पाएगी।
Published on:
14 May 2019 11:15 am
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