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विप्र कल्याण बोर्ड गठन के लिए निकाली अधिकार रैली

विप्र कल्याण बोर्ड गठन (Vip Kalyan Board constituted) और संत समाज से देवस्थान विभाग का चेयरमैन (Devsthan Department Chairman) बनाने की मांग को लेकर विप्र महासभा सहित कई ब्राह्मण संगठनों सोमवार को रैली निकाली। संत समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी सौरभ राघवेंद्र आचार्य और विप्र महासभा के प्रदेशाध्यक्ष सुनील उदेईया के नेतृत्व विप्र बंधु रैली के रूप में गवर्नमेंट हॉस्टल स्थित शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री निवास के लिए रवाना हुए।

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विप्र कल्याण बोर्ड गठन के लिए निकाली अधिकार रैली

विप्र कल्याण बोर्ड गठन के लिए निकाली अधिकार रैली

विप्र कल्याण बोर्ड गठन के लिए निकाली अधिकार रैली
- विप्र महासभा सहित कई ब्राह्मण संगठनों ने निकाली रैली
- शहीद स्मारक से सिविल लाइन फाटक तक निकाली रैली

जयपुर। विप्र कल्याण बोर्ड गठन (Vip Kalyan Board constituted) और संत समाज से देवस्थान विभाग का चेयरमैन (Devsthan Department Chairman) बनाने की मांग को लेकर विप्र महासभा सहित कई ब्राह्मण संगठनों सोमवार को रैली निकाली। संत समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी सौरभ राघवेंद्र आचार्य और विप्र महासभा के प्रदेशाध्यक्ष सुनील उदेईया के नेतृत्व विप्र बंधु रैली के रूप में गवर्नमेंट हॉस्टल स्थित शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री निवास के लिए रवाना हुए। हालांकि सिविल लाइन फाटक पर ही उन्हें रोक लिया गया। इसके बाद एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री निवास पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
रैली के दौरान विप्र बंधु विप्र कल्याण बोर्ड गठन और संत समाज से देवस्थान विभाग का चेयरमैन बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए चल रहे थे। रैली चौमूं हाउस सर्किल होते हुए सिविल लाइंस फाटक पहुंची तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस के बाद संत समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी सौरभ राघवेंद्र आचार्य के नेतृत्व में मुख्यमंत्री निवास गया, जहां मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को ज्ञापन सौंप परशुराम जयंती से पहले विप्र कल्याण बोर्ड गठन और संत समाज से देवस्थान विभाग का चेयरमैन बनाने की मांग की। संत समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी सौरभ राघवेंद्र आचार्य ने बताया कि परशुराम जयंती से पहले विप्र कल्याण बोर्ड का गठन नहीं किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देवस्थान विभाग का चेयरमैन संत समाज से हो तथा राजस्थान के देवस्थान बोर्ड के अधीन मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति सरकारी सेवक के रूप में हो।