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मासूमों का मर्ज बढ़ा रही वेंटिंग एमआरआई जांच

जेके लोन अस्पताल में अस्पताल प्रशासन की जांच सुविधाओं में विस्तार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। मौजूदा हाल यह है कि परिजन बच्चों को गोद में लेकर जांच के लिए घंटों एसएमएस अस्पताल में लगी कतार में जूझते रहते हैं। दरअसल, जेके लोन बच्चों का प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां न केवल आसपास जिलों से बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी गंभीर हालत में बच्चों को लाया जाता है। इनमें 30 से 40 बच्चों की एमआरआई जांच की जरूरत होती है। यहां इसकी सुविधा नहीं होने से परिजन बच्चों को एसएमएस या निजी अस्पताल लेकर जाते हैं। जांच नि:शुल्क होने की वजह से ज्यादातर परिजन एसएमएस अस्पताल में जांच कराते हैं। इस दौरान उन्हें काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। घंटों कतारों में जूझते रहते हैं।

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जेकेलोन

जेके लोन अस्पताल में अस्पताल प्रशासन की जांच सुविधाओं में विस्तार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। मौजूदा हाल यह है कि परिजन बच्चों को गोद में लेकर जांच के लिए घंटों एसएमएस अस्पताल में लगी कतार में जूझते रहते हैं। दरअसल, जेके लोन बच्चों का प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां न केवल आसपास जिलों से बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी गंभीर हालत में बच्चों को लाया जाता है। इनमें 30 से 40 बच्चों की एमआरआई जांच की जरूरत होती है। यहां इसकी सुविधा नहीं होने से परिजन बच्चों को एसएमएस या निजी अस्पताल लेकर जाते हैं। जांच नि:शुल्क होने की वजह से ज्यादातर परिजन एसएमएस अस्पताल में जांच कराते हैं। इस दौरान उन्हें काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। घंटों कतारों में जूझते रहते हैं। ये हाल कई वर्षों से बने हुए हैं लेकिन जिम्मेदार इससे अनजान हैं।


पीड़ित बोले, रात दो बजे का नंबर मिला
नागौर निवासी करण शर्मा ने बताया कि उनके बच्चे (3) को न्यूरो संबंधी परेशानी है। डॉक्टर ने एमआरआई जांच लिख दी। रात दो बजे का नंबर मिला। जांच कराने में काफी परेशानी हुई। भरतपुर निवासी बच्चे के पिता राकेश ने बताया कि एमआरआई जांच निजी लैब में महंगी होती है। एसएमएस अस्पताल में इसके लिए तीन तीन चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

ये दिक्कतें भी आईं सामने

चिकित्सकों ने बताया कि एसएमएस अस्पताल में एमआरआई जांच के लिए हमेशा वेटिंग मिलती है। कई बार गंभीर बच्चों को भी इंतजार करना पड़ता है। इसलिए ज्यादातर बच्चों को रात को बुलाते हैं। इधर, जांच के तकनीशियन का कहना है कि जांच के दौरान बच्चा हिले नहीं इसलिए नींद या बेहोशी में उसकी जांच की जाती है। इसलिए ज्यादातर को रात में बुलाते हैं।

प्रयास किए जा रहे

इस संबंध में जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि एमआरआई जांच मशीन नहीं होने से दिक्कत हो रही है। मशीन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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