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परकोटे में कैसे बचेगी विरासत…कोर्ट के स्टे के बावजूद रिहायशी भूखंड पर बन गईं 60 दुकानें

-पांच वर्ष में निगम रोक नहीं पाया अवैध निर्माण, नोटिस देता रहा और निर्माण चलता रहा

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जयपुर. परकोटे की पहचान हवेलियों से है, लेकिन पुरानी हवेलियों को तोडक़र नया निर्माण किया जा रहा है। कहीं कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं तो कहीं मार्केट खड़ा कर दिया गया। परकोटे में दुकानों की मुंहमांगी कीमत मिलती है। ऐसा ही एक मामला पुरानी बस्ती के बैराठियों के चौक का है। यहां तो नगर निगम ने अवैध निर्माण पर पांच साल तक आंखें मूंदकर रखीं। वहां आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक निर्माण हो गया और 60 दुकानें बन गईं।

निगम अधिकारियों की मिलीभगत का अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि निगम नोटिस भी देता रहा और निर्माण कार्य भी चलता रहा। मामला कोर्ट में पहुंचा और प्रगति रिपोर्ट मांगी तो निगम ने मौके पर निर्माण की बात स्वीकार की।

ये है मामला

-पुरानी बस्ती स्थित बैराठियों का चौक में भूखंड संख्या 184 में आवासीय भवन को ध्वस्त करके कॉम्प्लेक्स बनाने का काम वर्ष 2014 में शुरू हुआ।

-वर्ष 2019 मेे 60 दुकानें बना ली गईं। अभी इनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जबकि उक्त दुकानों तक आने के लिए सात से आठ फीट की ही गली है।

निगम ने किया सील के नाम पर दिखावा

-निर्माण स्वीकृति न लेने के चलते निगम ने पहली बार अक्टूबर 2014 को यह निर्माण 180 दिन के लिए सील कर दिया।

-निगम अधिकारियों से मिल सील खुलवा ली और ग्राउंड फ्लोर के बाद पहली मंजिल पर काम शुरू कर दिया।

-चार सितम्बर 2017 को निगम ने उक्त परिसर को 240 दिन के लिए फिर सील कर दिया। सील तोड़कर काम शुरू कर दिया। इसकी निगम ने नाहरगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

कोर्ट की भी चिंता नहीं

-उक्त निर्माण पर वर्ष 2017-18 से कोर्ट स्टे चल रहा है। कोर्ट ने बिल्डिंग बॉयलॉज के अनुरूप काम करने के आदेश दिए, लेकिन निर्माणकर्ता ने नहीं सुनी और न ही निगम अधिकारियों ने इसकी पालना करवाई।

कोर्ट में निगम अधिकारियों ने गलत तथ्य पेश किए। इसके अलावा हाल ही आरटीआई भी लगाई, लेकिन निगम अधिकारी इसका कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। जवाब नहीं देने के चलते अपील भी की है।

-भगवत गौड़, सचिव, धरोहर बचाओ समिति