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राजस्थान के जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार की पदोन्न्ति-150 चहेते इंजीनियरों को दो-दो पदोन्नति,100 करोड़ का वेतन उठाया

  कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एसीबी को नहीं दी गई जांच की अनुमति- एसआईटी से जांच कराने की मांग

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जयपुर. जल संसाधन विभाग में 1999 में निरस्त हो चुकी अस्थायी वरीयता सूची को आधार बना कर 150 चहेते इंजीनियरों को दो-दो पदोन्नति देने का मामला सामने आया है। इस संबंध में रिटायर्ड इंजीनियरों ने 24 जनवरी को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से जांच कराने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में सहायक अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता के पदों पर पदोन्नति के लिए डीपीसी हुई। इसके बाद वर्ष 2018 में विभाग के इंजीनियरों ने 2014 की डीपीसी को 1999 में निरस्त हो चुकी अस्थायी वरीयता सूची के आधार पर रिव्यू कर दिया। निरस्त वरीयता सूची में सहायक अभियंता के 1918 पद बताए गए और 2010 से सेवानिवृत्ति से रिक्त हुए पदों को आधार बना कर चहेते इंजीनियरों को एक साथ दो-दो पदोन्नति दे दी गईं।

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दबा दिया गया मामला
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रिटायर्ड इंजीनियरों ने यह मामला मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तक पहुंचाया। मामला एसीबी तक पहुंचा तो परिवाद दर्ज कर लिया गया, लेकिन इंजीनियरों के दबाव में एसीबी को जांच की अनुमति नहीं मिली। सेवानिवृत्त और विभाग में कार्यरत इंजीनियरों ने जल संसाधन विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को भी शिकायत दी, लेकिन मामले को दबा दिया गया।
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दोषियों को मिले सजा
सेवानिवृत्त इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को बताया कि गलत तरीके से पदोन्नत इंजीनियरों ने 2018 से अब तक करोड़ों रुपए का वेतन उठा लिया है। इस पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराकर दोषी इंजीनियरों को सजा दी जाए।


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