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राजस्थान का अनूठा गांव, जहां ईश्वर में तो आस्था रखते हैं लोग, पर नहीं है एक भी मंदिर

कोरोना महामारी ( Covid 19 ) के चलते जहां प्रदेश के सभी मंदिरों में लॉकडाउन ( Lockdown in Rajasthan ) का पहरा है और भक्तों को मंदिरों के खुलने का बेसब्री से इंतजार है वहीं राजस्थान में एक गांव ऐसा भी है जहां एक भी मंदिर नहीं है। राजस्थान का ये गांव अपने आप में बेहद अनूठा है...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Jun 09, 2020

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चूरू। कोरोना महामारी ( Covid 19 ) के चलते जहां प्रदेश के सभी मंदिरों में लॉकडाउन ( Lockdown in Rajasthan ) का पहरा है और भक्तों को मंदिरों के खुलने का बेसब्री से इंतजार है वहीं राजस्थान में एक गांव ऐसा भी है जहां एक भी मंदिर नहीं है। राजस्थान का ये गांव अपने आप में बेहद अनूठा है। इस गांव में लोग ईश्वर में तो अपनी आस्था रखते हैं लेकिन इसके बावजूद गांव में एक भी मंदिर नहीं है। इस गांव के लोग किसी धार्मिक कर्मकांड में विश्वास ही नहीं करते।


आश्चर्यजनक बात तो ये है कि यहां मृतकों की अस्थि प्रवाह जैसा भी कोई रिवाज नहीं है। यहां मरने वालों की अस्थियों को बहते पानी में प्रवाहित नहीं किया जाता। चूरू जिले की तारानगर तहसील के गांव ‘लांबा की ढाणी’ ( Lamba Ki Dhani ) के लोग कर्म में विश्वास करते हैं। 'लांबा की ढाणी की' में रहने वाले लोगों का ऐसा मानना है कि धार्मिक कर्मकांडो से बेहतर है कि इंसान अपनी मेहनत और लगन पर ज्यादा ध्यान दें। इसी के दम पर आज यहां के लोग शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार के क्षेत्र में सफलता अर्जित कर चुके हैं और अपने गांव को देश भर में नई पहचान दे रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार इस गांव में कई वर्षों यहां रहने वाले लोगों ने सामूहिक रूप से तय किया कि गांव में किसी की मृत्यु पर उसका दाह संस्कार तो किया जाएगा, लेकिन अस्थियों का नदी में विर्सजन नहीं होगा। यहां दाह संस्कार के बाद बची हुई अस्थियों को ग्रामीण फिर से जला कर राख में बदल देते हैं।


यह गांव पूरी तरह से कृषि प्रधान है। यहां बसे लोगों को मंदिर जैसी संस्था में शुरू से विश्वास नहीं था। वजह थी लोगों का सुबह से शाम तक मेहनत के काम में ही लगे रहना। यहां के लोग नास्तिक भी नहीं हैं, लेकिन धार्मिक अंधता जैसी चीज यहां दिखाई नहीं देती।


लांबा की ढाणी के लोगों को अपनी मेहनत पर विश्वास है। ये लोग कर्मण्येवाधिकारस्तु मा फलेषु कदाचन पर विश्वास करते हुए सिर्फ अपने कर्मों को शुद्ध रखते हुए कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं को नहीं मानते हुए ये लोग अपनों के मरने पर उनकी अस्थियां भी गंगा जी में प्रवाहित नहीं करते। सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात तो ये है कि इस गांव में कोई मंदिर ही नहीं है। गांव के सभी लोग पूजा-पाठ व धार्मिक कार्यो से अधिक महत्व अपने कर्म को देते हैं। गांव के लोगों के लिए उनका काम ही उनकी पूजा है। शायद इसी वजह से यहां गांव वाले काफी सफल भी हैं। अपने कर्म के बूते और लगन के दम पर यहां के लोगों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। यहां के युवक सेना में, पुलिस में, रेलवे में और चिकित्सा क्षेत्र में काम कर नाम कमा रहे हैं। यहां के कई युवकों ने खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी प्राप्त किये हैं।