
खाड़ी देशों में कैद राजस्थानी मजदूर Image AI
जयपुर। राजस्थान के छोटे-छोटे गांवों से रोजग़ार की तलाश में खाड़ी देशों की ओर उड़ान भरने वाले श्रमिकों के सपने अब उनके परिवारों के लिए सजा बन चुके हैं। सऊदी अरब, यूएई, कतर और अन्य खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर गए सैकड़ों राजस्थानी श्रमिक लापता हो चुके हैं।
इनमें से कई धोखेबाज एजेंटों के जाल में फंस गए, तो कुछ कठिन कामकाजी परिस्थितियों और कानूनी पचड़ों का शिकार बने। उनके बच्चों की मार्मिक गुहार, 'मोदी जी, मेरे पापा को ढूंढ दीजिए' ने इस दुखद स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान से सबसे अधिक श्रमिक खाड़ी देशों में जाते हैं, लेकिन राजस्थान के परिवारों की आंखें अपने प्रियजनों की राह तक रही हैं।
केस 1 : मम्मी का रो-रोकर बुरा हाल
झुंझुनूं जिले के मणकसास गांव के राकेश कुमार जांगिड़ ने एजेंटों के भरोसे करीब सवा लाख देकर भी वर्क वीजा की जगह 21 जून 2023 को टूरिस्ट वीजा पर दुबई भेज दिया गया। 6 जुलाई को आखिरी बार उन्होंने पत्नी से बात की थी, फिर फोन खामोश हो गया। घर में सन्नाटा छा गया। बेटी खुशी ने वीडियो संदेश में पीएम मोदी और विदेश मंत्री से मदद की अपील की। कांपती आवाज में कहा, 'मोदी जी, प्लीज मेरे पापा को ढूंढिए। हमारा घर टूट गया है… मम्मी दिन-रात रोती हैं।'
केस 2 : वर्क वीजा की जगह टूरिस्ट वीजा
साल 2021 में सीकर जिले के दांतारामगढ़ के रहने वाले रामस्वरूप कतर में निर्माण मजदूर के रूप में गए थे। एक स्थानीय एजेंट ने उनसे एक लाख तीस हजार रुपए लिए और वर्क वीजा का वादा किया। कतर पहुंचने पर उन्हें पता चला कि वे टूरिस्ट वीजा पर हैं। मजबूरी में रामस्वरूप ने अवैध रूप से काम शुरू किया, लेकिन 2022 में एक निर्माण स्थल पर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। रामस्वरूप की पत्नी सुशीला दो छोटे बच्चों के साथ अकेली संघर्ष कर रही हैं।
केस 3 : दो साल से कोई खोज-खबर नहीं
साल 2022 में जोधपुर का भंवरलाल ओमान में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी के लिए गए थे। उसके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। घर वालों से कुछ महीने संपर्क के बाद 2023 की शुरुआत में उनका फोन बंद हो गया। भंवरलाल के एक सहकर्मी ने बताया कि वह एक दुर्घटना में घायल हो गए था, लेकिन उसके बाद उसकी कोई खबर नहीं मिली। परिवार ने विदेश मंत्रालय और स्थानीय सांसद से मदद मांगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
बड़े धोखे है इस राह में…
यह हो सकते हैं समाधान
क्या कहते हैं पांच साल के आंकड़े-
वर्ष खाड़ी देश गए लापता श्रमिक प्रमुख कार्य क्षेत्र
2020 10,000 1,200 कंस्ट्रक्शन, घरेलू काम
2021 8,000 1,000 ड्राइविंग, होटल
2022 9,500 1,300 कंस्ट्रक्शन, सफाई
2023 11,000 1,400 कंस्ट्रक्शन, ड्राइविंग
2024 12,000 1,500 होटल, घरेलू काम
नोट : ये आंकड़े गैर-सरकारी संगठनों और मीडिया रिपोट्र्स पर आधारित हैं
Updated on:
25 Aug 2025 04:05 pm
Published on:
25 Aug 2025 03:51 pm
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