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ऐसा क्या हुआ कि जयपुर एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ ने दी सलामी

दुर्घटना में गंवाई अपनी जिंदगी, फिर भी 4 लोगों में जिंदा रहेगा सीकर का सुनील  

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देवेंद्र सिंह राठौड़/जयपुर. सड़क दुर्घटना में सीकर का सुनील भले ही जिंदगी की जंग हार गया, लेकिन इसके बाद भी उसके अंग 4 लोगों में जिंदा रहेंगे। दूजोद निवासी सुनील साई 16 फरवरी को खेत में काम कर घर लौट रहे था। इस दौरान उसकी गाड़ी को अज्ञात कार ने टक्कर मार दी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन सीकर के एस.के अस्पताल लेकर गए। जहां चिकित्सकों ने उसका उपचार किया, लेकिन उसकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती गई। उसे जयपुर के सवाईमानसिंह अस्पताल रैफर कर दिया गया। यहां चिकित्सकों ने ट्रोमा अस्पताल में उसे बचाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन वह बच नहीं सका। 19 फरवरी को चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डैड घोषित कर दिया। परिजनों की सहमति पर सुनील का हृदय इटरनल अस्पताल में भर्ती मरीज, लिवर मणिपाल अस्पताल में भर्ती मरीज और दोनों किडनियां सवाईमानसिंह अस्पताल के मरीजों को प्रत्यारोपित कर दिए गए। गत पांच पर्ष में 43 अंगदान करवाए जा चुके है।

इन डॉक्टरों ने की काउंसलिंग

इसके बाद अस्पताल के चिकित्सक डॉ.देवेंद्र पुरोहित, डॉ.चित्रा सिंह व ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर्स ने उसके परिजनों की समझाइश कर उन्हें मृतक के अंगदान के लिए प्रेरित किया। परिजनों ने बताया कि सुनील का 5 वर्ष का बेटा भी है। सुनील हर वक्त लोगों की मदद के लिए तैयार रहता था।

मानवता के लिए बड़ा काम

अंगदान की मुहीम को एसएमएस में लगातार गति मिल रही है। यह मानवता के लिए बड़ा काम है। टीम एसएमएस के प्रयासों और परिजनों के प्रशंसनीय निर्णय का ही नतीजा है कि परिजन अंगदान के लिए सहमत हो रहे हैं।डॉ.सुधीर भंडारी, प्राचार्य एवं नियंत्रक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज