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जयपुर
जयन्त शर्मा
IAS Officer कहते हैं पाप का घड़ा भर जाता है तो वह फूटता जरुर है, फिर चाहे आप सरकार चलाने वाले सीनियर आईएएस अफसर ही क्यों नहीं हो। ऐसा ही हुआ (Rajasthan Government) राजस्थान के रिटायर्ड (ACS Rajasthan) अतिरिक्त मुख्य सचिव उमराव सालोदिया के साथ। (family of IAS Umrao Salodia ) उमराव सालोदिया उर्फ उमराव खान अपने कार्यकाल के दौरान लगभग हर सरकार की (Good Governence) गुड़ बुक्स में रहे लेकिन उनकी हरकतों के चलते पहले तो उनके साथी अफसर और बाद में मंत्री भी उनसे दूर होते गए। नतीजा ये रहा कि उन्होनें रिटायरमेंट के ठीक एक दिन पहले (V R S) वीआरएस लिया और सरकार पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उनका आरोप था कि सरकार ने उन्हें जूनियर अफसर पर भरोसा दिखाया और उसके मुख्य सचिव बना दिया। फिलहाल सालोदिया जेल में हैं। मामला जमीन घोटाले से जुड़ा है।
पार्टी ने पहुंचाया फायदा, अब होगी पूछताछ
दरअसल पूरा मामला जमीन मामले में भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। जिसमें बताया कि नींदड़ बेनाड जयपुर में नींदड़ के जागीरदार सुरेंद्र सिंह द्वारा तत्कालीन जिला न्यायाधीश नानक राम शर्मा को वर्ष 1953 में जमीन दी गई थी। जिस पर वर्ष 1960 में नानकराम शर्मा के पक्ष में नामांतरण खोला गया था। इस जमीन का वर्ष 2001 में सुरेंद्र सिंह के पुत्र रणवीर सिंह द्वारा एसडीओ के समक्ष नामांतरण खारिज करने के लिए अपील की गई।
जिसे एसडीओ द्वारा तयशुदा समय से ज्यादा अवधि (टाइम बार्ड) कहकर अपील खारिज कर दी। ये फैसले के खिलाफ रणवीर सिंह द्वारा संभागीय आयुक्त जयपुर के यहां अपील की गई। जिस पर संभागीय आयुक्त ने एसडीओ को निर्देश दिए कि पुनः सुनवाई कर फैसला दिया जावे। इस पर नानकराम शर्मा एवं रणवीर सिंह द्वारा रेवेन्यू बोर्ड अजमेर में भी अपील कर दी गई।इस अपील पर रेवेन्यू बोर्ड अजमेर के तत्कालीन सदस्य हरिशंकर भारद्वाज,अध्यक्ष रेवेन्यू बोर्ड उमराव सालोदिया द्वारा रणवीर सिंह से षड्यंत्र पूर्वक मिलीभगत कर पद का दुरुपयोग करते हुए एक तरफा फैसला दिया। जिस फैसले को आधार मानते हुए आनन-फानन में तहसीलदार आमेर,गिरदावर एवं पटवारी आमेर द्वारा चार दिवस में रणवीर सिंह के पक्ष में नामांतरण खोल दिया। एसीबी के संपूर्ण अनुसंधान के पश्चात उक्त अभियुक्तों के विरुद्ध पद का दुरूपयोग एवं षड्यंत्र करने संबंधी आईपीसी की धाराओं में अपराध पाया गया।
सालोदिया ने सोचा कोर्ट पहुंचे तो बच जाएंगे लेकिन नहीं बच सके
इस मामले में सोमवार को एसीबी ने कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में चालान के समय सालोदिया भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि सालोदिया को उम्मीद थी कि अगर वे कोर्ट पहुंचेंगे तो कोर्ट उन पर नरमी बरतेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिन लोगों के खिलाफ चालान पेश किया गया। उनमें से सिर्फ उमराव ही वहां मौजूद थे। चालान पेश होने के बाद कोर्ट ने उमराव को अरेस्ट कर जेल भेजने का आदेश दिया। अब वे पांच सितम्बर तक जेल में रहेंगे।
Published on:
27 Aug 2019 10:01 am
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