19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कहां गई वीरांगना, सूना पड़ा है आंगन, सास बोली…बहुएं चाहिए, बच्चों को सता रही मां की याद

गोविंदपुरा बासड़ी निवासी शहीद रोहिताश लांबा की वीरांगना मंजू देवी जाट की 30 घंटे बाद भी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर वह कहां है। शनिवार सुबह जरूर वीरांगना व उसकी देवरानी ने सास घीसी देवी से फोन पर बात की थी, लेकिन उन्हें पता नहीं है कि उनको कहां पर रखा गया है।

2 min read
Google source verification
Where did it go Martyr Rohitash Lamba wife

मनोहर व्यास/मुकेश कुमार
राड़ावास/शाहपुरा। गोविंदपुरा बासड़ी निवासी शहीद रोहिताश लांबा की वीरांगना मंजू देवी जाट की 30 घंटे बाद भी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर वह कहां है। शनिवार सुबह जरूर वीरांगना व उसकी देवरानी ने सास घीसी देवी से फोन पर बात की थी, लेकिन उन्हें पता नहीं है कि उनको कहां पर रखा गया है। वहीं पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं है। जयपुर में गुरुवार देर रात धरने से उठाकर पुलिस ने मंजू को अमरसर सीएचसी में भर्ती करा दिया था और उसके देवर जितेंद्र लांबा को घर छोड़ दिया था।

बाद में पुलिस ने वीरांगना की देवरानी हंसा देवी को भी यह कहकर अस्पताल बुलाया था कि वीरांगना इलाज नहीं ले रही है उसको समझाओ। इस पर देवरानी हंसा भी उसके पास आ गई। मंजू व हंसा दोनों बहनें हैं।

शुक्रवार को राज्यसभा सांसद डॉ.किरोडीलाल मीणा के आने की सूचना लगते ही प्रशासन व पुलिस के हाथ पांव फूल गए। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वीरांगना व उसकी देवरानी को पुलिस शुक्रवार दोपहर 12 बजे अमरसर सीएसची से अन्यत्र स्थान पर ले गई। इसके बाद से वीरांगना कहां पर है उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

शहीद के परिजनों ने लगाया तानाशाही का आरोप
वीरांगना के परिजनों ने राज्य सरकार व प्रशासन पर तानाशाही व शहीद परिवारों का अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रोहिताश लांबा की शहादत के चार साल बाद भी उनके घर से मुख्य सड़क तक महज 250 मीटर की पक्की सड़क नहीं बन पाई। शहीद स्मारक भी अपने खर्चे पर बनाया है। जिसके भी चारदीवारी निर्माण की लगातार मांग की जा रही है। शहादत के समय राज्य सरकार के मंत्रियों ने ही शहीद के भाई को नौकरी देने का वादा किया था जो आज मुकर रहे हैं।

सुबह 10 बजे हुई थी वीरांगना से बात
शहीद के पिता बाबूलाल लांबा व माता घीसी देवी ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे से मंजू व हंसा को पुलिस द्वारा अज्ञात स्थान पर रखा गया है। काफी मन्नतें करने पर शनिवार 10 बजे पुलिस ने फोन पर बात करवाई। वीरांगना ने परिजनों को बताया कि 4 दिन से उसने कुछ भी खाया पिया नहीं है। किस स्थान पर रखा गया है इसके बारे में वे नहीं बता पाई।

सास बोली...बहुएं चाहिए, बच्चों को सता रही मां की याद
वीरांगना की सास घीसी देवी ने बताया कि दोनों बहुओं को दो दिन से पुलिस निगरानी में रखा हुआ है। पीछे से बच्चों को संभालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बहुएं चाहिए। मंजू के पुत्र ध्रुव व देवर जितेंद्र के बच्चे प्रियांशु व तनु को मां के बिना संभालना मुश्किल हो रहा है। बच्चों को दिनभर तो संभाल लेते हैं, लेकिन शाम ढलते ही तीनों बच्चे मां को याद करके परेशान करते हैं।

इनका कहना है
वीरांगना कहां है यह तो उसके परिजनों को पता होगा। हमारा इससे कोई लेना देना नहीं है। वीरांगना को पुलिस क्यों लेकर जाएगी।
राजीव पचार, एसपी जयपुर ग्रामीण