
नारी सशक्तीकरण का आधुनिक प्रतीक हैं ये तीन महिलाएं, इनमें से दो का है राजस्थान से कनेक्शन
जयपुर. देश की फर्स्ट जनरेशन की लड़ाकू विमान महिला पायलट्स की जिंदगी अपने आप में एक कौतुहल पैदा करती है। खुशखबर यह है कि एक इन्फोटेनमेंट टीवी चैनल पर शुक्रवार को आने वाली सीरीज 'वीमन फाइटर पायलट्स' में इन वुमन फाइटर पायलट्स की जिंदगी को करीब से देखने का मौका मिलेगा। यह सीरीज लोगों को अपने दौर की पायोनियर तीन वुमन अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह की दिलचस्प कहानी से जोड़ेगी। ये महिलाएं ऐसी हैं, जो मुश्किलों से जूझते हुए लोगों की सोच बदल रही हैं। खास बात यह है कि इन तीन महिला फाइटर्स में से दो का कनेक्शन राजस्थान से है। इनमें अवनी चतुर्वेदी राजस्थान की वनस्थली विद्यापीठ में पढ़ी हैं तो मोहना सिंह झुंझुनूं से बिलॉन्ग करती हैं।
यही नहीं, ये महिला फाइटर पायलट नारी सशक्तीकरण का आधुनिक प्रतीक हैं। इन्होंने ऐसी भारतीय महिलाओं के अरमानों को पंख लगा दिए हैं, जो भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनना चाहती हैं और जी-सूट पहनकर अपने देश की सेवा करना चाहती हैं। इस सीरीज में तीन पायलट्स, उनके परिवार और उनके स्क्वाड्रन के कलीग्स के इमोशंस भी दर्शाए जाएंगे यानी उनकी जिंदगी का हर पहलू देखने को मिलेगा। इस शो के दौरान ये तीन फाइटर पायलट्स यह भी बताएंगी कि मीडिया में उनके लड़ाकू खेमे में शामिल होने की चर्चा से उन पर क्या दबाव पड़ा।
शुरुआत में स्क्वाड्रन में एडजस्ट करना थोड़ा मुश्किल रहा
वनस्थली विद्यापीठ से बी.टेक. करने वाली अवनी चतुर्वेदी कहती हैं, 'जब हम मशहूर हुए तो शुरुआत में स्क्वाड्रन में एडजस्ट करना थोड़ा मुश्किल रहा। हमारी पॉपुलैरिटी और हमारे काम की जरूरत से ज्यादा सराहना हमारे लिए जरा मुश्किल थी, क्योंकि फौज का मतलब संगठित होकर टीम के रूप में कार्य करना है। ऐसे में अगर पूरी टीम की चर्चा नहीं हो रही है तो सिर्फ हम तीनों की क्यों?'
फोर्स में शामिल हों ज्यादा से ज्यादा महिलाएं
झुंझुनूं से ताल्लुक रखने वाली मोहना सिंह सीरीज के बारे में कहती हैं, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि यह दबाव की बात है, लेकिन हां यह ऐसा प्रदर्शन करने की बात है जिससे आपकी ओर देख रहे लोगों को आप भरोसा दिला सकें। इसमें फाइटर स्ट्रीम का चयन करने वाली महिलाओं का विकास दर्शाया गया है, ताकि इस बारे में जागरुकता पैदा हो और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा सके।'
किसी तरह का दबाव नहीं
भावना कांत का कहना है, 'मुझे नहीं लगता कि हम पर किसी तरह का कोई दबाव है। मैं अपना काम कर रही हूं। यह कुछ ऐसा है जो मैं हमेशा से ही करना चाहती थी- एक फाइटर पायलट बनकर अपने देश की सेवा। यदि लोग इससे प्रेरित होते हैं तो मैं दबाव क्यों महसूस करूंगी। मैं आज भी अपना काम कर रही हूं।'
आपको बता दें, साल 2015 तक एयर फोर्स एकेडमी के फ्लाइट कैडेट्स को उड़ान की तीन श्रेणियों के विकल्प दिए जाते थे, जिनमें हेलिकॉप्टर्स, ट्रांसपोर्ट और फाइटर्स शामिल थे। इसमें फाइटर उड़ान केवल पुरुषों के लिए आरक्षित थी। फिर भारतीय वायु सेना ने अपने फाइटर फ्लाइंग प्रोग्राम में फीमेल कैडेट्स को भी शामिल करने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया, जिसे एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर 5 साल के लिए लागू किया गया। इसके बाद इतिहास रचते हुए तीन महिला फाइटर पायलट्स अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह के पहले बैच को भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन में शामिल किया गया।
Updated on:
24 Aug 2018 12:51 am
Published on:
24 Aug 2018 12:39 am
