25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

World Asthma Day 2018: जानें क्या है अस्थमा, कैसे बचें इस बीमारी से, क्या है कारण और लक्षण

World Asthma Day 2018 पर जानें इस बीमारी के बारे में वो सब कुछ जो जानना है जरूरी  

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Nidhi Mishra

May 01, 2018

World Asthma Day 2018- Symptoms, Sign, Causes, Treatments in Hindi

World Asthma Day 2018- Symptoms, Sign, Causes, Treatments in Hindi

जयपुर। हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। अस्थमा फेफड़ों से संबंधित बीमारी है, जिसके होने से सांस लेने में दिक्कत आती है। इसके कारण सांस लेने वाली नलियों में सूजन भी आ जाती है और श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। इसके चलते पेशेंट को सांस लेने में परेशानी होती है, सांस लेते समय आवाज आती है, सीने में जकड़न, खांसी जैसी समस्‍याएं होती हैं।


लक्षणों के आधार पर दो तरह का अस्थमा

लक्षणों के आधार अस्थमा के दो प्रकार हैं-
1. बाहरी अस्थमा— बाहरी एलर्जन के प्रति एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है। ये परागकणों, जानवरों और धूल मिट्टी जैसी चीजों से होता है।
2. आंतरिक अस्थमा— कुछ रासायनिक तत्वों के सांस द्वारा शरीर में प्रवेश से होता है। जैसे— सिगरेट का धुआं, पेंट वेपर्स आदि।


अस्थमा बीमारी के मुख्य कारण

प्रदूषण, कल कारखानों, वाहनों से निकलने वाला धुआं
सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, मौसम में बदलाव
एलर्जी फूड्स
पेट में अम्‍ल की अधिक मात्रा
दवाईयां, शराब का सेवन और कई बार भावनात्‍मक तनाव भी
अत्‍यधिक व्‍यायाम
आनुवांशिक


अस्‍थमा के कारण

एलर्जिक अस्थमा: धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से दमा हो जाता है। कई बार मौसम परिवर्तन के साथ ही भी अस्थमा होता है।

नॉनएलर्जिक अस्थमा: इस तरह का अस्थमा किसी एक चीज की अति से होता है। ज्यादा तनाव, बहुत तेज हंसना, तेज सर्दी या तेज खांसी-जुकाम इसके कारण हो सकते हैं।

मिक्सड अस्थमा: इसका कोई कारण विशेष नहीं है। कई बार ये एलर्जिक तो कई बार नॉन एलर्जिक कारणों से होता है। इस अस्थमा के होने के कारणों को पता लगाना भी मुश्किल होता है।

एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा: कई लोगों को एक्सरसाइज या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है।

कफ वेरिएंट अस्थमा: जब लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी में कफ ज्यादा आता है तो अस्थमा अटैक पड़ता है।

ऑक्यूपेशनल अस्थमा: अचानक काम ? के दौरान पड़ने वाला अस्थमा है। कई बार कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करने पर भी अस्थमा हो सकता है।

नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा: ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है।

मिमिक अस्थमा: आमतौर पर मिमिक अस्थमा तबियत अधिक खराब होने पर होता है। आमतौर पर स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी बीमारी जैसे निमोनिया, कार्डियक अरेस्ट आदि के कारण ये अस्थमा हो सकता है।

चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा: सिर्फ बच्चों को ही होता है। अस्‍थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है अस्थमा ठीक हो जाता है। फिर भी इसका समय पर उपचार जरूरी है।

एडल्ट ऑनसेट अस्थमा: अकसर 20 साल की उम्र के बाद होता है। मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहना।


लक्षण

बलगम या सूखी खांसी
सीने में जकड़न
सांस लेने में दिक्कत
सांस लेते समय घरघराहट की आवाज
रात में या सुबह के समय गंभीर स्थिति
ठंडी हवा में सांस लेने से गंभीर हालत होना
व्यायाम के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य खराब होना
जोर-जोर से सांस लेना
कई बार उल्टी होने की भी संभावना बढ़ जाती है।


अस्‍थमा इलाज का परीक्षण

आमतौर पर विशेषज्ञ डॉक्‍टर खासतौर से फेफड़ों की जांच करते है। इसमें स्‍पायरोमेट्री, पीक फ्लो और फेफड़ों के कार्य का परीक्षण शामिल होता है। जांचें अलग-अलग स्थिति में की जाती हैं। इसके अलावा मेथाकोलिन चैलेंज, नाइट्रिक ऑक्‍साइड टेस्‍ट, इमेजिंग टेस्‍ट, एलर्जी टेस्टिंग, स्प्‍यूटम ईयोसिनोफिल्‍स टेस्‍ट होते हैं। व्‍यायाम और अस्‍थमा युक्‍त जुकाम के लिए प्रोवोकेटिव टेस्‍ट किया जाता है।


अस्‍थमा का उपचार

— इन्‍हेल्‍ड स्‍टेरॉयड (नाक के माध्‍यम से दी जाने वाली दवा)
— अन्‍य एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं
— ब्रोंकॉडायलेटर्स (वायुमार्ग के चारों तरफ की मांसपेशियों को आराम देकर अस्थमा से राहत दिलाते हैं।)
— अस्‍थमा इन्‍हेलर
— अस्‍थमा नेब्‍यूलाइजर का भी प्रयोग उपचार में किया जाता है।
— ओरल कोर्टिकोस्टेरॉयड्स


अस्‍थमा से बचाव

— बारिश और सर्दी, ज्‍यादा धूल भरी आंधी से बचना चाहिए
— ज्‍यादा गर्म और ज्‍यादा नम वातावरण से बचना चाहिए
— घर से बाहर निकलने पर मास्‍क साथ रखना चाहिए
— सर्दी के मौसम में धुंध में नहीं जाना चाहिए
— धूम्रपान करने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए
— घर को डस्‍ट फ्री रखना चाहिए
योग ? के विभिन्न आसन करने चाहिए जैसे सूर्य नमस्‍कार, प्राणायाम, भुजंगासन
— एलर्जी से दूर रहना चाहिए, संभव हो तो हमेशा गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए


बेहतर होना चाहिए खान पान
डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजों का सेवन कम
कोल्‍ड ड्रिंक, ठंडा पानी और ठंडी प्रकृति वाले आहारों का सेवन नहीं
अंडे, मछली और मांस जैसी चीजें अस्‍थमा में हैं हानिकारक
हरी पत्‍तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए
पालक और गाजर का रस अस्‍थमा में काफी फायदेमंद
विटामिन ए, सी और ई युक्‍त खाद्य पदार्थ अस्‍थमा मरीजों के लिए लाभकारी
एंटीऑक्‍सीडेंट युक्‍त फूड के सेवन से रक्‍त में आक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है
आहार में लहसुन, अदरक, हल्‍दी और काली मिर्च को शामिल करना चाहिए