
polycystic ovary syndrome increasing in young girls
जयपुर। आजकल छोटी उम्र में ही लड़कियों में पीसीओएस यानि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम देखा जा रहा है, जिसकी वजह से लड़कियों में लड़कों के हार्मोन बढ़ जाते हैं। 11 से 18 वर्ष की किशोरियां इस सिंड्रोम की ज्यादा शिकार हो रही हैं। इस बीमारी को सिर्फ अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर ही नियंत्रित किया जा सकता है, इसे जड़ से नहीं मिटाया जा सकता।
क्या है ये सिंड्रोम
कुछ समय पहले तक इसे पीसीओडी यानि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज कहा जाता था, लेकिन अब कई शोधों से ये साबित हो गया है कि ये सिंड्रोम है। बीमारी में सिर्फ एक ही सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है, लेकिन सिंड्रोम में कई सारे सिस्टम्स प्रभावित होते हैं।
हाल ही में अध्ययन
पैथोलॉजिस्ट लेबोरेट्री की एक बहुराष्ट्रीय शृंखला ने भारत की युवतियों पर हाल ही एक समावेशी अध्ययन किया। इस अध्ययन में 18 महीने की अवधि में उन्होंने महिलाओं के फ्री टेस्टेस्टेरॉन के 27,411 सैम्पल लिए। इन सैम्पल में से 17.60 फीसदी यानि 4824 नमूनों में पीसीओएस कन्फर्म हुआ। केवल उत्तर भारत में ही 18.62 फीसदी युवतियों में पीसीओएस पाया गया।
यंग गर्ल्स में ज्यादा प्रॉब्लम
फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एण्ड गायनोकोलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया (एफओजीएसआई) ने भी माना है कि यंग गर्ल्स में पीसीओएस काफी बढ़ गया है। वैश्विक स्तर पर भी इस समस्या को गंभीरता से लिया गया है। लंदन में 3 अक्टूबर और अमरीका के सीटल में 16 से 18 नवंबर तक पीसीओएस कॉफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है, ताकि लोगों में खासकर यंग गल्र्स में इस सिंड्रोम के प्रति जागरूकता लाई जा सके।
क्या है पीसीओएस
पीसीओएस एक मेटाबॉलिक सिंड्रोम है। महिलाओं के शरीर में मेल हार्मोंस अधिक होने लगते हैं। शरीर में हार्मोनल संतुलन गड़बड़ हो जाता है। ओव्यूलेशन व मासिक चक्र रुक सकता है। इसमें ओवेरी की परिधि पर नेकलेस अपीयरेंस बन जाती है। समस्या लगातार बनी रहती है, तो न केवल ओवेरी और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है, बल्कि कैंसर का खतरा बढ़ता है।
प्रमुख लक्षण
चेहरे पर बाल उग आना, मुंहासे होना, पिगमेंटेशन, अनियमित रूप से माहवारी आना व गर्भधारण में मुश्किल होना है।
प्रमुख कारण
खराब जीवन शैली, मोटापा, कॅरियर व पढ़ाई का तनाव, जंक फूड, किसी प्रकार का नशा करना।
डॉक्टर ने कहा
मेरे पास आने वाली यंग गल्र्स में 90 फीसदी पीसीओएस से जुड़ी शिकायतें लेकर आती हैं, जिनमें से लगभग सभी को अल्ट्रासाउंड के बाद पीसीओएस कंफर्म होता है। पिछले 10 सालों में इस सिंड्रोम की शिकायत ज्यादा आ रही है। इस सिंड्रोम को केवल जीवनशैली में बदलाव लाकर ही नियंत्रित किया जा सकता है, जिसमें 30 मिनट वॉक करना (नंगे पैर), जंक फूड और ज्यादा तला खाना अवॉइड करना है।
- डॉ. उमा बिस्सा, पूर्व एचओडी, ऑब्स गायनी, उम्मेद अस्पताल
Published on:
01 May 2018 09:49 am
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