
World Bipolar Day 2024: विश्व के महान डच कलाकार विंसेंट वान गॉग के जन्मदिन पर हर साल 30 मार्च को विश्व बायपोलर डिसॉर्डर दिवस मनाया जाता है। उनकी रचनात्मकता एक तरह से उनकी मानसिक बीमारी मानी गई। हालांकि उनके मरणोपरांत पता चला कि उन्हें बायपोलर डिसॉर्डर था। दरअसल, बायपोलर डिसॉर्डर एक तरह की मानसिक बीमारी है, जिसका समय से उपचार जरूरी है। हालांकि इस बीमारी से ग्रस्त इंसान बिलकुल सामान्य जीवन जीने में सक्षम होता है। यदि इस रोग की पहचान कर उसे इसके बारे में जानकारी दी जाए। यह एक ऐसी बीमारी है कि जब रोगी कई दिनों अतिउत्साही, सक्रिय, अतिरूप से खुश रहता है तो दूसरे एपिसोड में बिना कारण ही उदासी उसे घेर लेती है। अति उत्साह में कई बार वे गलत व्यवहार भी कर बैठते हैं। बस, उनके इसी अतिउत्साह और उदासीनता को बैलेंस करना ही इस विकार का उपचार है। इस मानसिक बीमारी को लेकर जागरूकता के लिए आज यह दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाता है।
किसी भी उम्र में होता है
इस पर डॉक्टर्स का कहना है कि यह रोग बच्चों से लेकर किशोरों, युवाओं, बुजुर्गों में हो सकता है। इस रोग में नींद, उत्साह और गतिविधियों में बदलाव आने लगता है। कई जगह यह रोग आनुवांशिक भी होता है। ऐसे लोग एक ही समय में अलग—अलग मानसिक स्थितियों से गुजरते हैं। उनका व्यवहार, उनकी आदतों से बिलकुल अलग महसूस होने लगता है।
यह हैं लक्षण
— लंबे समय तक अत्यधिक खुश रहना
— गतिविधियों का असामान्य तौर पर बढ़ जाना
— अतिआत्मविश्वासी हो जाना
— असामान्य रूप से बातूनी होना
— अप्रत्याशित व्यवहार करना
— लंबे समय तक उदास रहना
— हर गतिविधि में रूचि खो देना
— आत्महत्या का विचार करना
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क्या हैं कारण
— मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन
— आनुवांशिक रोग
— जीवन में कोई दर्दनाक घटना, किसी बुरे बर्ताव या बुरे रिश्ते का ट्रोमा
क्या करें
— डॉक्टर से सलाह लें
— बिना सलाह दवाइयां बंद ना करें
— खुद को इस बीमारी के लिए जागरूक रखें
— योग और व्यायाम करें
— सांस लेने की तकनीक का अभ्यास करें
— रचानात्मक कामों में व्यस्त रहें
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क्या ना करें
— दवाएं लेना ना भूलें
— खुद को दूसरों से अलग ना करें
— शराब या अन्य मादक पदार्थों का सेवन ना करें
उपचार ऐसे होगा
बायपोलर डिसॉर्डर के रोगी को इस बारे में शिक्षित या जागरूक करना बहुत जरूरी है। ताकि वो असामान्य व्यवहार को कंट्रोल करना सीखें। अत्यधिक खुशी वाले दिनों में वो यह समझे कि यह उसकी बीमारी के कारण ही है या अत्यधिक उदासी वाले दिनों को भी वो बीमारी ही माने। ताकि वो अपने व्यवहार से परेशान होकर कोई गलत कदम ना उठाए। इसमें मनोविशेषज्ञ से रेगुलर चेकअप और बराबर दवाइयां लेना जरूरी होता है। इस मनोरोग में दवाइयां उम्रभर चलती हैं, लेकिन रोगी सामान्य जीवन जी सकता है। उसे परेशानी नहीं आती।
डॉ. मनस्वी गौतम, मनोरोग विशेषज्ञ
Updated on:
30 Mar 2024 02:54 pm
Published on:
30 Mar 2024 02:52 pm

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