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विश्व प्रवासी पक्षी दिवस आज- अच्छी बरसात ने बनाए प्रवासी परिंदों के नए ठिकाने

राजस्थान में इस बार हुई अच्छी बरसात ने इस बार प्रवासी परिंदों के लिए नई सौगात लेकर अाई है। बरसात के चलते उनके लिए कई नई वॉटर बॉडी इन परिंदों का ठिकाना बन गई हैं।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Oct 08, 2022


राजस्थान में इस बार हुई अच्छी बरसात ने इस बार प्रवासी परिंदों के लिए नई सौगात लेकर अाई है। बरसात के चलते उनके लिए कई नई वॉटर बॉडी इन परिंदों का ठिकाना बन गई हैं। विश्व प्रवासी पक्षी दिवस पर एक राखी हजेला की एक
सुदूर देशों से आते हैं पक्षी
गौरतलब है कि हर साल हिमालय पार मध्य एशिया, चीन,रूस, तिब्बत,भूटान, अफगानिस्तान और साइबेरिया से कई प्रजातियों के पक्षी आकर जलमहल में अपना बसेरा बनाते हैं। चार से पांच महीने रहने के बाद माच-र्अप्रैल में गर्मियां शुरू होते ही यह फिर अपने वतन लौट जाते हैं। ठंडे देशों में बर्फ गिरती है तो तालाब, नदी जमने लगती है। तब यह पक्षी भारत की ओर रुख करते हैं।
परिंदों का आशियाना बन रही नई वॉटर बॉडीज
पक्षी विशेषज्ञों की माने तो हर साल की तरह इस बार भी परिंदों ने अपना रुख चंदलाई, बरखेड़ा और मानसागर की तरफ किया लेकिन प्रदेश में हुई अच्छी बरसात के चलते जगह जगह नई वॉटर बॉडीज बनी हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में दलदली इलाका, जहां पानी तो है लेकिन इतना अधिक नहीं कि परिंदे यहां ठहर नहीं सकें। गौरतलब है कि परिंदे उन वॉटर बॉडीज को अपना ठिकाना बनाते हैं जहां का पानी छिछला होता है जिससे उन्हें भोजन के शिकार आसानी से मिल पाता है। इतना ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आमतौर पर स्थानीय ग्रामीण भी परिंदों का शिकार करने के स्थान पर उनका संरक्षण करते हैं। ऐसे में प्रवासी परिंदों ने सालों से अपने तयशुदा वॉटर बॉडीज के रास्ते में पडऩे वाली अन्य वॉटर बॉडीज को भी अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। यह स्थिति सिर्फ राजस्थान की नहीं है बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी है जहां प्रवासी परिंदे आते हैं। सुरक्षित आवासद्व भोजन की प्रचुरताद्व प्रजनन आदि की सुविधा के कारण प्रवासी पक्षी नई वॉटर बॉडीज पर भी जा रहे हैं। राजस्थान की बात करें तो इस बार माही डेम पर बड़ी संख्या में फ्लेमिंगों ने अपना डेरा बनाया है।
किसानों का मददगार होते हैं परिंदे
पक्षी किसानों के हमदर्द व मददगार भी है। यह तालाबों के तल की सफाई का कार्य करते हैं। खेतों से कीट.पतंगों को खाकर फसलों को नुकसान पंहुचने से बचाते हैं और जलस्रोतों की सफाई करने का कार्य करते हैं। गांव के जलस्रोतों व तालाबों की ओर रुख करने वाले पक्षी में सफेद व काला बुज्जा, घोंघिल, छोटी सिल्ही, पनडुब्बी, सामान्य जलमुर्गी, जामुनी जलमुर्गी, कांस्य पंख जलपीपी, टिटहरी, गजपाव, बगुलों की कई प्रजाति हैं।
इन परिंदों का है इंतजार
पक्षी प्रेमियों को मानसागर, चंदलाई और बरखेड़ा और कानोता डैम में नॉर्दन शॉवलर, यूरेशियन विजन,कॉमन पोचार्ड,रूडी शेल डक, बार हैडेड गूज, गुगराल, यूरेशियन स्पेनबिल, सी गुल्स,ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, वारहेडेड गीज, पिनटेल, पेंटेड स्टोर्क, लार्ज, येलो वैगटेल,स्पॉट बिल डक, डार्टर आदि का इंतजार है जो हर साल यहां पर आती हैं । फिलहाल यहां पक्षी प्रेमियों को कॉमन टील, कॉरमोरेंट, यूरोपियन कॉलर डव, हाउस स्पेरो, इंडियन कॉरमोरेंट, लिटिल कॉरमोरेंट, पॉण्ड हेरोन, ग्रे हेरोन, आदि ही देखने को मिल रही हैं।
इनका कहना है
चंदलाई बरखेड़ा में प्रवासी परिंदे आने शुरू हो गए हैं लेकिन उनकी संख्या अभी अधिक नहीं है। इसकी वजह है अधिक बरसात। जिसकी वजह से उन्हें खाने के लिए भोजन नहीं मिल पा रहा और वह यहां अपना ठिकाना फिलहाल नहीं बना पा रहे।
किशन मीणा, पक्षी प्रेमी और फोटोग्राफर
इस बार जयपुर सहित पूरे राजस्थान में अच्छी बरसात हुई है। जिसके चलते नई वॉटर बॉडीज बनी हैं और यह वॉटर बॉडीज प्रवासी परिंदों का नया ठिकाना बन रही है। जो एक अच्छी शुरुआत है।
मनीष सक्सेना, वन्यजीव और पक्षी विशेषज्ञ