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World Paper Bag Day: प्लास्टिक कचरे से बिगड़ रही है गुलाबी शहर की खूबसूरती

बारिश के मौसम में जगह-जगह ड्रेनेज सिस्टम चोक हो रहे हैं और इससे शहर में पानी भरने जैसी समस्या शुरू हो गई है, जिससे दुर्घटना का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।

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World Paper Bag Day: बारिश के मौसम में जगह-जगह ड्रेनेज सिस्टम चोक हो रहे हैं और इससे शहर में पानी भरने जैसी समस्या शुरू हो गई है, जिससे दुर्घटना का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में चोक ड्रेनेज सिस्टम के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार प्लास्टिक बैग हैं। जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने के बावजूद शहर के कई क्षेत्रों में इसका उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। हालांकि बड़े और संगठित रिटेल मार्केट में पेपर बैग्स का इस्तेमाल किया जाने लगा, फिर भी अनऑर्गनाइज्ड सेगमेंट में आज भी प्लास्टिक बैग्स को लेकर इतनी जागरूकता नहीं है। यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद सिगरेट पैक, प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, ट्रे सहित कटलरी आइटम, ईयरबड्स, स्‍वीट बॉक्‍स आदि पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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बांग्लादेश बना प्लास्टिक बैन करने वाला पहला देश

पहली बार 2002 में बांग्लादेश प्लास्टिक बैग पर बैन लगाने वाला पहला देश बना। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका, रवांडा, चीन, ऑस्ट्रेलिया और इटली ने इसके इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया था। पेपर बैग 19वीं सदी की देन है।

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सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को व्यापारी संगठनों का समर्थन

जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को लेकर राजधानी जयपुर के व्यापारी संगठनों ने पहल शुरू कर दी है। अब बाजार में पॉलीथिन की जगह पेपर बैग का उपयोग होने लगा है। शहर में कुछ दुकानेां को छोड़कर सभी जगहों पर पेपर बैग का इस्तेमाल होने लगा है। बड़े और संगठित रिटेल मार्केट में पेपर बैग्स का इस्तेमाल किया जाने लगा। हालांकि, अनऑर्गनाइज्ड सेगमेंट में अभी भी प्लास्टिक बैग्स को लेकर इतनी जागरूकता नहीं आई है।

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प्लास्टिक से होने वाले खतरे...

प्लास्टिक बैग सड़ता-गलता नहीं, इसका सबसे ज्यादा नुकसान हमारी मिट्टी पर पड़ता है। हमारी फूड चेन में भी माइक्रोप्लास्टिक और माइक्रोफाइबर पाया जा रहा है। पानी, अनाज, दूध, फल सबमें अब थोड़ा ही सही प्लास्टिक मौजूद है।

माइक्रोप्लास्टिक अम्बिलिकल कॉर्ड में भी पाया जाता है। प्लास्टिक का कुल वैश्विक उत्पादन 9 बिलियन टन से भी ज्यादा है यानी धरती पर मौजूद हर व्यक्ति के जिम्मे एक टन से ज्यादा प्लास्टिक है।

पृथ्वी पर कुल प्लास्टिक का वजन मनुष्यों और जानवरों के कुल वजन से दोगुना हो चुका है और अगर यही रफ्तार रही, तो 2060 तक प्लास्टिक उत्पादन तीन गुना हो जाएगा।

प्लास्टिक की थैलियों को नष्ट होने में 500 साल तक लग सकता है, इसलिए वे हमारे लैंडफिल में मौजूद चीजों का एक बड़ा हिस्सा हैं और हमारे वॉटरवेज को प्रदूषित करते हैं।

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पेपर बैग के फायदे...

पेपर बैग बायोडिग्रेडेबल हैं। यह खराब होने के बाद प्लास्टिक बैग की तरह लैंडफिल में नहीं जाते, बल्कि खराब होकर पूरी तरह मिट्टी का हिस्सा बन जाते हैं।

इसमें रखे जाने वाले फूड और ग्रासरी फ्रेश बने रहते हैं।

इन्हें रिसाइकिल करने में हार्म फुल गैसेज रिलीज नहीं होती जैसी प्लास्टिक बैग में होती हैं। इससे इनका दोबारा इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है।