इस नई उपचार पद्धति में बिना सर्जरी, बिना चीरा या टाँका के, केवल चमड़ी को सुन्न करके, केवल इंजेक्शन की मदद से ही स्पाइन संबंधी इलाज किया जा रहा है।
जयपुर। विश्व में हर व्यक्ति को स्पाइन से जुड़ी समस्या जरूर होती है। हालांकि कई मामलों में यह अपने आप ठीक भी हो जाती है लेकिन ऐसे मरीज, जो लंबे समय से स्पाइन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं उनके लिए इंजेक्शन ट्रीटमेंट वरदान से कम नहीं है। इस नई उपचार पद्धति में बिना सर्जरी, बिना चीरा या टाँका के, केवल चमड़ी को सुन्न करके, केवल इंजेक्शन की मदद से ही स्पाइन संबंधी इलाज किया जा रहा है।
नई तकनीक द्वारा कई खतरों से बचाव
सीके बिरला हॉस्पिटल के सीनियर पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट डॉक्टर संजीव शर्मा ने बताया कि स्पाइन से जुड़ी समस्या में अगर सर्जरी होती है तो इसके कुछ संभावित खतरे हो सकते हैं जैसे कि लकवा/ पैरालिसिस, पैराप्लेजिया, ब्लैडर बोवेल के नुकसान, इम्प्लांट फेलियर। लेकिन इंजेक्शन ट्रीटमेंट में कमर के जोड़ों की सूजन कम करना या दबी हुई नसों को खोलना, आदि उपचार किया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति से गर्दन या कमर की स्लिप डिस्क, साइटिका, सर्वाइकल रेडीक्युलोपैथी, डिजरनेरेटिव डिस्क, फैसिट ज्वाइंट सिंड्रोम, स्पाइन कनाल स्टेनोसिस जैसी बीमारियों में कारगर इलाज पाया जा सकता है। खास बात यह है कि 18 से लेकर 85 साल तक के लोग भी इस ट्रीटमेंट का फायदा ले सकते हैं।
जड़ समेत बीमारी का समाधान
दरअसल, यह चिकित्सा पद्धति एक यूएस-एफड़ीए स्वीकृत स्पाइनल इंजेक्शन तकनीक है। प्रशिक्षित डॉक्टर के हाथों से, इसमें किसी भी तरह का बड़ा साइड इफेक्ट नहीं होता है। यह जड़ से बीमारी को मिटाने मे कारगर है एवं 90 से 95 फीसदी तक सफल रहता है। यह इंजेक्शन सी-आर्म या अल्ट्रासाउंड मशीन की सहायता से सटीक जगह पर लगाया जाता है, जिससे यह कारगर चिकित्सा पद्धति साबित हुई है। इंजेक्शन के जरिए होने वाली चिकित्सा में मरीज एक घंटे बाद ही घर जा सकता है, जबकि स्पाइनल सर्जरी में उसे दो से चार हफ्ते तक का आराम करना पड़ता है।